क्षेत्र की पेयजल योजना लुथान अधर में लटक गई है। साढ़े तीन साल से योजना पूरी नहीं हो पाई है। योजना पर डेढ़ करोड़ खर्च किया गया है।
योजना के शुरू न होने से करीब दो दर्जन गांवों के बाशिंदों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने आईपीएच विभाग की कार्यप्रणाली पर रोष जताया है।
पूर्व पंचायत प्रधान जगत राम, शंभू लाला, प्रताप सिंह, तिलक राज, शक्तिचंद, रामदयाल, राजकुमार, पवन कुमार, सरोज कुमारी, राजेश जंबाल आदि ने कहा कि योजना का शिलान्यास तीन अक्तूबर 2012 को तत्कालीन खाद्य आपूर्ति मंत्री रमेश धवाला ने किया था।
शिलान्यास के बाद साढ़े तीन साल बीत जाने पर भी पेयजल योजना का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है। लोगों ने बताया कि क्षेत्र में हैंडपंप और प्राकृतिक पेयजल स्रोत न होने से लोगों को गर्मियों के मौसम में पानी के लिए भटकना पड़ता है।
वर्तमान में जिस पेयजल योजना से क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति हो रही है, उसकी दूरी अधिक है। इसके चलते पर्याप्त पेयजल की आपूर्ति नहीं होती है। पशुओं के लिए भी करीब एक किलोमीटर का सफर तय कर पानी भरना पड़ता है। लोगों ने विभाग से मांग की है कि क्षेत्र के लिए बन रही पेयजल योजना का निर्माण कार्य जल्द पूरा किया जाए।
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दो ट्यूबवैल के माध्यम से पानी उठाने वाली लुथान पेयजल योजना बनकर तैयार है। कुछ ही दिनों में पानी को भंडारण टैंकों में डालकर ट्रायल किया जाएगा। मार्च से पहले योजना को चालू कर दिया जाएगा।
-जसबंत सिंह, जेई आईपीएच विभाग