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सिविल अस्पताल नादौन के पास नहीं अपनी एंबुलेंस

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नादौन अस्पताल में खड़ी कबाड़ बनी एंबुलेंस। - फोटो : Hamirpur-HP
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नादौन(हमीरपुर)। नागरिक अस्पताल का दर्जा मिलने के बावजूद नादौन अस्पताल में मूलभूत सुविधाओं की कमी है। अस्पताल की अपनी एक एंबुलेंस तक नहीं है। यहां मरीजों को महज 108 एंबुलेंस के माध्यम से ही अस्पताल पहुंचाया या रेफर किया जा रहा है। जबकि, 102 गर्भवतियों के लिए मौजूद है। 108 एंबुलेंस भी महज एक होने से अगर दो मरीजों को एक समय में एंबुलेंस की जरूरत पड़े तो एक मरीज को टैक्सी में ले जाना पड़ता है।
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अस्पताल को अब नया भवन परिसर मिल चुका है, परंतु मूलभूत सुविधाओं की अभी भी किल्लत है। वर्ष 1997 में अस्पताल को एक एंबुलेंस मिली थी जो अब कबाड़ बन चुकी है। जबकि, सुजानपुर और टौणी देवी सिविल अस्पतालों को वहां के विधायक राजेंद्र राणा ने विधायक निधि से एंबुलेंस उपलब्ध करवाई है। यहां तक अस्पताल में बीएमओ की गाड़ी चलते भी 15 वर्षों से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन वह भी नहीं बदली गई है। नादौन के कार्यकारी बीएमओ डॉ. बीएस राणा ने बताया कि 108 की सहायता से लोगों को एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध करवाई जाती है।
क्या कहते हैं लोग-
108 एंबुलेंस पर निर्भर है प्रशासन : अखिलेश
अखिलेश कुमार ने कहा कि सिविल अस्पताल नादौन में अपनी कोई भी एंबुलेंस सुविधा उपलब्ध नहीं है। अस्पताल में रोगियों को लाने व ले जाने के लिए प्रशासन पूरी तरह से 108 या निजी सुविधा पर ही निर्भर है।
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लोगों के पास नहीं कोई विकल्प: अभिषेक
अभिषेक कुमार ने कहा कि सबसे अधिक समस्या उस समय होती है जब 108 एंबुलेंस आपात स्थिति में कहीं गई हो, ऐसे में लोगों के पास कोई विकल्प नहीं होता। उन्होंने कहा कि प्रत्येक अस्पताल के पास अपनी एंबुलेंस सेवा उपलब्ध रहती है। ऐसे में नादौन में भी अपनी एंबुलेंस होनी चाहिए।
समिति की निजी एंबुलेंस पर भी है निर्भरता : सतीश
सतीश कुमार ने बताया कि नादौन में सुंदराशी मणिमहेश सेवा समिति की ओर से उपलब्ध करवाई निजी एंबुलेंस के भरोसे ही मरीज अन्य अस्पतालों में जाते हैं। यदि यह सेवा भी किसी कारण बंद हो जाए तो लोगों की परेशानी का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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