लोकमित्र संचालक मांगों को लेकर उपायुक्त को ज्ञापन सौंपने जाते हुए।
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हमीरपुर। जिला सीएससी, सीवीएलई सोसायटी हमीरपुर का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को उपायुक्त हमीरपुर से मिला और मांगपत्र सौंपा। इस दौरान इस वर्ग ने इनके लिए सही नीति, नियमों और उचित सेवा शुल्क निर्धारित करने की मांग की है। लोकमित्र संचालकों ने कहा कि जब कोई एक लोकमित्र केंद्र की शुरुआत करता है, उसके लिए कम से कम एक लैपटॉप, फोटोस्टेट मशीन, कलर प्रिंटर, फर्नीचर, स्टेशनरी इत्यादि की आवश्यकता करनी होती है। इसके लिए शुरुआत में ही खर्च कम से कम डेढ़ लाख बन जाता है। लोकमित्र या तो खुद की दुकान में कार्य शुरू करता है या किराये की दुकान लेता है।
इंटरनेट, बिजली, पानी व दुकान का खर्च भी दस से बारह हजार हो जाता है। ये सारा खर्च लोकमित्र खुद करता है, सरकार या विभाग की तरफ से एक रुपये की सहायता नहीं की जाती है। बस सरकार का बोर्ड लगाने के लिए बोल दिया जाता है तथा सरकार के नियमों और रेट लिस्ट के प्रतिबंध लगा दिए जाते हैं। एक लोकमित्र केंद्र की कुल कमाई एक दिन में 185.68 रुपये पड़ती है, जोकि मनरेगा की दिहाड़ी से भी कम है।
लोकमित्र अपने परिवार का खर्च कैसे चलाएगा। दूसरी ओर कई साइबर कैफे कार्य कर रहे हैं, जो अपनी मनमर्जी के शुल्क वसूल रहे हैं। इन्होंने मांग की है कि लोकमित्र संचालकों के लिए एक निर्धारित मानदेय तय किया जाए, जो न्यूनतम दस हजार हो। जिससे लोकमित्र लोगों को सेवाएं सरकार की ओर से निर्धारित शुल्क पर प्रदान कर सकें। जल्द से जल्द पंचायत घर या किसी सरकारी भवन में बैठाने की व्यवस्था की जाए। सोसायटी के अध्यक्ष सुमित राठौर, उपाध्यक्ष शशिपाल और सचिव राजेश कुमार ने कहा कि उन्हें आशा है कि प्रदेश सरकार और प्रशासन इनकी मांगों पर उचित कार्रवाई करेगा।