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Himachal: राज्यपाल कविंद्र गुप्ता बोले- संयुक्त परिवार व्यवस्था कमजोर होने से संस्कृति से दूर हो रहे युवा

Wed, 03 Jun 2026 08:49 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने कहा कि संयुक्त परिवार की परंपरा कमजोर होने से युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति, संस्कारों और सामाजिक मूल्यों से दूर होती जा रही है। 
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राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने अमर उजाला हिमाचल हाई फ्लायर्स कॉफी टेबल बुक-2026 का लोकार्पण किया। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने कहा कि संयुक्त परिवार की परंपरा कमजोर होने से युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति, संस्कारों और सामाजिक मूल्यों से दूर होती जा रही है। नई पीढ़ी का का अपनी जड़ों से जुड़े रहना और संस्कृति को आत्मसात करना बेहद आवश्यक है। बुधवार को शिमला में अमर उजाला की कॉफी टेबल बुक-हाई फ्लायर्स के विमोचन समारोह में राज्यपाल ने कहा कि समाज में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति गंभीर चिंता का विषय है। यह केवल एक व्यक्ति या परिवार की समस्या नहीं, बल्कि पूरे समाज और देश के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। समाज में जागरूकता बढ़ाने, नशे जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ व्यापक जनआंदोलन खड़ा करने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे।

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उन्होंने कहा कि जब समाज अपनी सांस्कृतिक विरासत और पारिवारिक मूल्यों से दूर होता है, तब सामाजिक विकृतियां जन्म लेने लगती हैं। संयुक्त परिवार व्यवस्था बच्चों और युवाओं को संस्कार, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाती थी, लेकिन इसके कमजोर होने से नई पीढ़ी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। राज्यपाल ने कहा कि युवाओं को आधुनिकता के साथ-साथ अपनी परंपराओं और संस्कृति से भी जुड़े रहना चाहिए। यही संतुलन उन्हें बेहतर नागरिक और राष्ट्र निर्माण में सहभागी बनाएगा। उन्होंने अभिभावकों और सामाजिक संगठनों से भी युवाओं को सही दिशा देने की अपील की।
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विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने में युवाओं की भागीदारी जरूरी

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि देश को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब समाज का प्रत्येक वर्ग अपनी जिम्मेदारी निभाएगा। इसके लिए शिक्षा, नवाचार, सामाजिक जागरूकता और नैतिक मूल्यों को मजबूत करना जरूरी है। विकसित भारत का सपना केवल सरकार का कार्यक्रम नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों का साझा संकल्प है। युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा और सकारात्मक सोच इस लक्ष्य को हासिल करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएगी।
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