शिमला-मटौर फोरलेन के पैकेज नंबर-2 भराड़ीघाट-घुमारवीं के अधीन आने वाले नौणी-भराड़ीघाट फोरलेन को अभी तक केंद्रीय वन मंत्रालय की मंजूरी नहीं मिल पाई है। इस कारण फोरलेन की टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी इसका निर्माण कार्य लटका है। फोरलेन की भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। किसानों को जमीन और मकानों का मुआवजा भी दिया जा चुका है। अभी तक वन विभाग की अनुमति नहीं मिल पाई है। इस फाइल में कुछ आपत्तियां लगाई गई थीं, उन्हें दूर करके फाइल दोबारा केंद्रीय वन मंत्रालय को भेजी है। एनएचएआई का कहना है कि इसी माह केंद्रीय वन मंत्रालय की अनुमति मिलने की उम्मीद है। अगर अनुमति मिल जाती है तो नवंबर में फोरलेन का काम शुरू हो जाएगा।
640 करोड़ से 17.5 किलोमीटर लंबे फोरलेन का होना है निर्माण
17.5 किलोमीटर लंबे फोरलेन को बनाने में 640 करोड़ की लागत आएगी। इसके बाद अगले वित्त वर्ष में भराड़ीघाट-शालाघाट और शालाघाट-शिमला फोरलेन की टेंडर प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। शिमला-मटौर फोरलेन के बनने पर प्रदेश के दो प्रमुख शहर शिमला और धर्मशाला में पर्यटकों व अन्य लोगों को बेहतर यातायात सुविधा मिलेगी। इसके शुरू होने से शिमला से धर्मशाला की दूरी करीब 43 किलोमीटर कम हो जाएगी। इससे इन शहरों में आने-जाने में कम समय लगेगा। पर्यटन कारोबार में भी बढ़ोतरी होगी।
पांच पैकेज में बांटा है काम
शिमला-मटौर फोरलेन जल्द धरातल पर उतरे इसके लिए एनएचएआई ने इसे पांच पैकेज में बांटा है। शिमला-मटौर फोरलेन के परियोजना निदेशक विक्रम सिंह मीणा ने बताया कि नौणी-भराड़ीघाट फोरलेन को केंद्रीय वन मंत्रालय की इस महीने मंजूरी मिलने की उम्मीद है। मंजूरी मिलते ही इसका काम शुरू हो जाएगा।