दवाएं, टूथपेस्ट और हाल ही में हरे मटर का सैंपल भी तय मानकों पर खरा नहीं
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रजनीश मनिकताला ने अदालत को बताया कि हिमाचल में 670 कंपनियां दवाएं बना रही हैं। दवा निर्माता कंपनियों को सरकार तय मानकों के आधार पर स्टैंडर्ड सर्टिफिकेट और लाइसेंस जारी करती है। दवाइयां बेचने से पहले लैब में इनकी टेस्टिंग होती है। उसके बाद ही इन्हें दूसरे राज्यों में जाता है। सीडीएससीओ ने इन्हीं दवाइयों के जब सैंपल लिए तो इनमें 186 फेल पाई गई। हाईकोर्ट में 2023 में दायर इस जनहित याचिका पर संज्ञान लिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने कहा कि जानबूझकर और मिलीभगत से दवाओं की गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है। सरकार को इस पर नकेल कसनी चाहिए। कोर्ट को यह भी बताया गया कि कुछ बड़ी कंपनियों की दवाएं, टूथपेस्ट और हाल ही में हरे मटर का सैंपल भी तय मानकों पर खरा नहीं उतरा है।