उधर, रामगोपाल मंदिर का मामला उठाते हुए विधायक मलेंद्र राजन ने कहा कि डमटाल स्थित इस मंदिर की करोड़ों रुपये की संपत्ति है। लेकिन, मंदिर की हालत खराब हो गई है। अनियमितताओं की जांच होनी चाहिए। जवाब में उपमुख्यमंत्री ने बताया कि मंदिर के नाम पर डमटाल में 16 हजार कनाल, शाहपुर में 145 कनाल, पठानकोट में 548 कनाल भूमि है। 15 करोड़ की एफडीआर है, पांच होटल, दो पेट्रोल पंप और 12 क्रशर भी मंदिर के नाम पर हैं। मंदिर पर हुए खर्च का रिकॉर्ड तलब किया गया है। पूर्व सरकार ने चुनाव से एक माह पहले मंदिर के निर्माण के लिए नौ करोड़ रुपये मंजूर किए थे। इसे अब रोकने का फैसला लिया है। भाषा एवं संस्कृति विभाग के सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाकर मंदिर की संपत्ति का ब्योरा एकत्र किया जाएगा। भूमि की डिमारकेशन करवाई जाएगी। मंदिर को भव्य बनाने के लिए योजना भी तैयार की जाएगी। संपत्ति को सहेजने के लिए भी कमेटी सुझाव देगी। मंदिर की भूमि पर किस-किस के कब्जे हैं, इसकी भी पड़ताल की जाएगी।