ठगी की रकम के लेनदेन की कड़ियों को खंगाला जा रहा
वहीं दूसरे आरोपी की भूमिका प्रारंभिक जांच में साइबर ठगी से जुड़े लोगों के ठहरने की व्यवस्था करने और बैंक खातों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सामने आई है। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत के समक्ष पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। जांच के दौरान संबंधित बैंक से आवश्यक दस्तावेज और बैंकिंग रिकॉर्ड भी प्राप्त किए हैं। ठगी की रकम के लेनदेन की कड़ियों को खंगाला जा रहा है। अब पुलिस आरोपियों से पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर साइबर ठगों और उनके नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों की पहचान और भूमिका की जांच कर रही है।
साइबर ठगी को इस तरह दिया अंजाम
साइबर क्राइम सेल शिमला के अनुसार 11 सितंबर को पुलिस को नालागढ़ की कंपनी प्रबंधन की ओर से शिकायत मिली। इसमें बताया कि कंपनी से 2.10 करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी हुई है। प्रारंभिक जांच में पता चला कि साइबर ठगों ने कंपनी के एक अधिकारी के नाम और प्रोफाइल का इस्तेमाल करते हुए कर्मचारी से व्हाट्सएप के जरिये संपर्क किया। साइबर ठगों ने कर्मचारी से कंपनी के बैंक खाते से 2.10 करोड़ रुपये एक अन्य खाते में ट्रांसफर करने के लिए कहा। कर्मचारी ने भी अधिकारी समझकर रकम बताए खाते में ट्रांसफर कर दी। बाद में पड़ताल करने पर पता चला कि वह व्हाट्सएप नंबर कंपनी के अधिकारी का था ही नहीं। इसके बाद उन्हें अपने साथ हुई धोखाधड़ी का आभास हुआ। मामले की शिकायत साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर की। जांच में मामले के तार राजस्थान से जुड़े मिले। इसके बाद पुलिस की टीम ने वहां दबिश देकर मामले में संलिप्त दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। जांच प्रभावित न हो, इसे देखते हुए आरोपियों की पहचान उजागर नहीं की जा रही है।
इस प्रकार की जाती है ठगी
फर्जी प्रोफाइल: ठग असली मालिक या सीईओ की फोटो लगाकर व्हाट्सएप, ईमेल या अन्य मैसेजिंग ऐप पर फर्जी अकाउंट बनाते हैं।
जल्दबाजी का दबाव : वह जरूरी मीटिंग या गोपनीय प्रोजेक्ट का बहाना बनाकर कर्मचारी पर तुरंत पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाते हैं।
डर का फायदा : फाइनेंस या अकाउंट्स टीम के कर्मचारी डर या संकोचवश बिना पुष्टि किए पैसे ट्रांसफर कर देते हैं।
बचाव और सावधानियां
सत्यापन करें: पैसे भेजने से पहले बॉस को सीधे फोन कॉल या आमने-सामने बात करके पुष्टि करें।
नंबर जांचें : संदेश भेजने वाले के नंबर या ईमेल आईडी की सावधानीपूर्वक जांच करें।
संदिग्ध फाइलें न खोलें : व्हाट्सएप या ईमेल पर आई किसी भी अज्ञात जिप या एपीके फाइल को डाउनलोड न करें।
यदि आप इस तरह के साइबर अपराध का शिकार हो जाएं तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें।
गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी
साइबर क्राइम सेल शिमला की टीम ने नालागढ़ में कंपनी के साथ हुई साइबर धोखाधड़ी के मामले में कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। साइबर ठगी करने वाले गिरोह के सदस्यों और अन्य आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस तकनीकी पहलुओं और पूछताछ के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है। कंपनी के अकाउंट्स और अन्य विभागों के कर्मचारी इस तरह के अपराधों से बचने के लिए अधिकारियों की ओर से पैसे ट्रांसफर करने के निर्देशों का एक बार सत्यापन करें तो इससे बचा जा सकता है।-अमित यादव, एसपी, साइबर क्राइम सेल शिमला