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रामभरोसे छोड़ दिए पांच हजार कैंसर रोगी

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चंबा। जिले के पांच हजार कैंसर रोगियों को रामभरोसे ही छोड़ दिया गया है। मेडिकल कॉलेज चंबा के कैंसर विभाग में अब एक भी कैैंसर विशेषज्ञ नहीं है। ओपीडी में ताला लटका है। पहले इस विभाग में तीन विशेषज्ञ थे। इनमें से एक विशेषज्ञ ने चार माह पहले नौकरी छोड़ने के लिए प्रबंधन को रिजाइन दे दिया था जबकि, एक महिला विशेषज्ञ मेटरनिटी लीव पर हैं। तीसरे विशेषज्ञ का कुछ दिन पहले कैंसर में सुपर स्पेशियलिटी कोर्स के लिए चयन हो गया है।
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वह तीन साल के लिए दिल्ली में कोर्स पूरा करेंगे। उसके बाद ही हिमाचल में अपनी सेवाएं देने के लिए लौटेंगे। तब तक चंबा जिले के कैंसर रोगियों का इलाज राम भरोसे रहेगा।
आलम यह है कि मेडिकल कॉलेज की कैंसर ओपीडी जहां इन विशेषज्ञों के जाने से बंद हो गई है, तो वहीं कीमोथैरेपी सुविधा भी बंद हो गई है। इसके चलते कैंसर रोगियों को अब अपना इलाज करवाने के लिए जिले के बाहर जाना पड़ेगा। जिले में पांच हजार कैंसर रोगियों में महिलाओं के मुकाबले पुरुष मरीजों की संख्या आठ प्रतिशत अधिक है। मुंह, गले सहित अन्य कैंसर रोगों से ये मरीज पीड़ित हैं।
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पिछले वर्ष मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में 571 कैंसर रोगी इलाज करवाने के लिए पहुंचे थे। इन मरीजों को कीमोथैरेपी सहित अन्य उपचार दिया जा रहा है। रोजाना कैंसर ओपीडी में दस से पंद्रह कैंसर रोगी इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में अब उन्हें बिना इलाज करवाए लौटना पड़ेगा।
कॉलेज प्राचार्य डॉक्टर रमेश भारती ने बताया कि कैंसर विभाग में चल रही डॉक्टरों की कमी के बारे में सरकार को अवगत करवा दिया गया है। जल्द सरकार यहां कैंसर विशेषज्ञों की नियुक्ति कर सकती है।
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