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अमर उजाला शिक्षा अभियान : स्कूलों में शिक्षक खेल गतिविधियों से सुधार रहे बच्चों का शिक्षा स्तर

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अनोगा स्कूल में कैरम बोर्ड खेलकर गिनती का अभ्यास करते नौनिहाल। - फोटो : Chamba
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चंबा। कोरोना काल में प्राइमरी स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों के शिक्षा स्तर को सुधारने के लिए अब शिक्षक पूरी कसरत कर रहे हैं। अक्षर ज्ञान से लेकर लेेखन तक के स्तर को सुधारने के लिए अध्यापक कई तरह के प्रयोग कर रहे हैं। इसके लिए शिक्षक जहां बच्चों के लिए कक्षाओं में मैत्रीपूर्ण माहौल बनाने में जुटे हुए हैं तो वहीं, पढ़ाई के लिए टीएलएम (पठन पाठन सामग्री) का प्रयोग कर रहे हैं। बच्चों के शिक्षा स्तर को सुधारने के लिए शिक्षकों की ओर से किए जा रहे प्रयासों को लेकर संवाददाता पंकज सलारिया ने विभिन्न स्कूलों के जेबीटी अध्यापकों से
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बात की।
बच्चों को पढ़ाया जा रहा बेसिक : अनु
प्राइमरी स्कूल बरौर में तैनात अनु ठाकुर का कहना है कि कोरोना महामारी के चलते छोटे बच्चों का शिक्षा स्तर कम हुआ है। कुछ बच्चों के पास स्मार्ट फोन नहीं थे तो वहीं, कुछ बच्चों के अभिभावक अशिक्षित थे। अब स्कूल खुल गए हैं। रोजाना बच्चों को बेसिक पढ़ाया जा रहा है। साथ ही इसके लिए पठनपाठन सामग्री का भी प्रयोग किया जा रहा है।
बच्चों में करवाई जा रही गतिविधियां : मनोज
प्राइमरी स्कूल हैंडा में कार्यरत शिक्षक मनोज कुमार का कहना है कि कोरोना काल में बच्चों को हर घर पाठशाला के तहत पढ़ाया गया। साथ ही जिन बच्चों के पास स्मार्ट फोन नहीं थे, उन्हें होमवर्क डोर-टू-डोर पहुंचाया गया। बच्चों में कुछ खामियां दिखी हैं, जिन्हें दुरुस्त करवाने के लिए कई तरह की गतिविधियां करवाई जा रही हैं।
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शिक्षा स्तर में लाया जा रहा सुधार : दीप्ती
प्राइमरी स्कूल सरू में तैनात महिला शिक्षक दीप्ती दास का कहना है कि कोविड काल में विद्यार्थी कक्षाओं से दूर हो गए थे। ऑनलाइन माध्यम से शिक्षा को जारी रखने की कोशिश की गई। बावजूद इसके विद्यार्थियों के शिक्षा स्तर में गिरावट आई। इसके लिए अब कक्षाओं का माहौल मैत्रीपूर्ण बनाया जा रहा है। मैत्रीपूर्ण व्यवहार से उनके स्तर में सुधार लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
लिखाई सुधारने के किए जा रहे प्रयास : टंडन
अनोगा स्कूल में तैनात युद्धवीर टंडन का कहना है कि कोरोना काल में स्कूल बंद रहने के चलते सबसे बड़ा असर बच्चों की लिखाई पर पड़ा। साथ ही बच्चों की शब्द पहचान भी कमजोर हुई। अब इसके लिए बच्चों की रोजाना लिखाई बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही शब्द पहचान के लिए पठनपाठन सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है।
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