चंबा की मणिमहेश डल झील के पास पूजा अर्चना करने के बाद बैठे लोग। संवाद
भरमौर (चंबा)। मणिमहेश यात्रा के दौरान पवित्र डल झील तोड़ने की परंपरा 10 सितंबर को दोपहर बाद निभाई जाएगी। संचूई गांव से त्रिलोचन महादेव के वंशज शिव के चेले (गूर) इस परंपरा को निभाएंगे।
इस बार मणिमहेश यात्रा के दौरान पवित्र डल झील तोड़ने की परंपरा 10 सितंबर को दोपहर बाद निभाई जाएगी। राधाष्टमी का शाही स्नान मंगलवार रात 11 बजकर 13 मिनट पर शुरू होगा। शाही स्नान बुधवार रात 11 बजकर 47 मिनट पर खत्म होगा। इस दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालु शुभ मुहूर्त के दौरान मणिमहेश डल झील में आस्था की डुबकी लगाएंगे।
सोमवार को संचूई के चेलों का रात्रि ठहराव धन्छौ में रहेगा। लिहाजा मंगलवार को शिव चेले डल तोड़ने की रस्म निभाएंगे। इसके बाद विधिवत रूप से राधा अष्टमी का पवित्र स्नान आरंभ होगा। दो दिन तक प्रसिद्ध चौरासी मंदिर परिसर में यात्रियों को डल झील की ओर जाने की अनुमति देने के बाद सोमवार को संचूई के शिव चेले भी अपने अगले पड़ाव के लिए रवाना हो गए। सोमवार को शिव चेलों ने चौरासी स्थित मुख्य शिव मंदिर की परिक्रमा की और डल झील की ओर निकल गए। इस दौरान उन्होंने प्रंघाला के निकट स्थित कातिक स्वामी मंदिर में भी हाजिरी लगाई। लिहाजा सोमवार रात को शिव चेले धन्छौ पहुंच गए हैं। मंगलवार सुबह ये पवित्र डल झील पहुंचेंगे। जहां पर पूजा-अर्चना के बाद शिव चेले पवित्र डल की परिक्रमा करने के बाद डल तोड़ने की परंपरा का निर्वहन करेंगे। जिसके बाद श्रद्धालु उन्हें अपने कंधों पर उठाने के लिए आगे बढ़ते हैं। शिव गूरों को श्रद्धालु कंधों पर उठाकर उनके असली स्थान पर ले जाते हैं। जहां से शिव चेले श्रद्धालुओं को को आशीर्वाद देते हैं।
इनसेट
चंबा जिले के भरमौर स्थित हड़सर से करीब 13 किलोमीटर दूर चोटी पर मणिमहेश झील है। झील के सामने कैलाश पर्वत पर पवित्र मणि के दर्शन होते हैैं। यहां झील में स्नान करने के साथ ही भगवान भोले के दर्शन करने आते हैैं। हर साल यह यात्रा श्री कृष्ण जन्माष्टमी से राधाष्टमी तक चलती है।
महंत आकाश गिरी ने बताया कि राधाष्टमी का स्नान दंपति के लिए सुख स्मृद्धि का रहता है। लिहाजा, अधिकांश दंपति राधाष्टमी का स्नान करने के लिए मणिमहेश पहुंचते हैं।