नोटा यानी उम्मीदवार को नापसंद करने का अधिकार भले ही पंचायत चुनाव में पहली बार मिला हो, मगर इसका कोई खास फायदा मतदाता को नहीं होगा। नोटा की अहमियत मतदान न करने के बराबर ही रहेगी। मतगणना के समय नोटा की गिनती तो होगी, लेकिन उम्मीदवारों पर इसका कोई असर नहीं होगा।
भले ही पंचायत में एक तिहाई से ज्यादा लोग नोटा पर मुहर लगा दें। इसके बावजूद चुनाव का परिणाम बाकी बचे मतों से ही होगा। नोटा में मतदाताओं को उम्मीदवारों के भविष्य तय करने का कोई अधिकार नहीं दिया गया है। जबकि उम्मीद यह थी कि नोटा लागू होने के बाद एक तिहाई से ज्यादा मतदाता इसका इस्तेमाल करते हैं तो चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों पर भविष्य में प्रतिबंध लग सकता है।
मगर पंचायतीराज विभाग ने चुनाव आयोग से ऐसे कोई दिशानिर्देश न मिलने की बात कही है। नोटा का इस्तेमाल करने वाले मतदाताओं को भड़ास निकालने का इस बार भी कोई फायदा नहीं होगा। विभाग की मानें तो नोटा पर मुहर लगाने के बाद मतपत्र को अन्य मतपत्रों से अलग कर लिया जाएगा और विजेता का फैसला बाकी बचे मतों से होगा।
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नोटा तय नहीं करेगा उम्मीदवारों का भविष्य : विभाग
उधर, पंचायतीराज विभाग के अधिकारी एमएस नेगी का कहना है कि नोटा के लिए कोई गाइडलाइन नहीं बनी है। नोटा को अलग से गिना जरूर जाएगा लेकिन उम्मीदवारों के भविष्य का फैसला नोटा से नहीं होगा। नोटा के अलावा जो मत बचेंगे उनकी गिनती होगी और जिसके पास ज्यादा मत होंगे वो चुनाव जीत जाएगा।