करीब दो हजार की संख्या वाले चंबा कॉलेज में सुरक्षा नियम ताक पर हैं। कॉलेज का मेन गेट चंबा-पठानकोट हाईवे पर खुलता है।
यह हाईवे का बाईपास है और रोजाना अनगिनत छोटी और बड़ी गाड़ियां यहां से गुजरती रहती हैं। करीब दो साल पहले जब अखंड चंडी पैलेस से कॉलेज को सुल्तानपुर बदला गया था तो उद्घाटन के मौके पर खुद मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कॉलेज में चारदीवारी को पहली प्राथमिकता बताया और इसके रास्ते में आने वाली सभी रुकावटों को दूर करने के निर्देश प्रशासनिक अधिकारियों व कॉलेज प्रबंधन को जारी कर दिए। लेकिन दो साल गुजर जाने के बाद भी यह जटिल समस्या जस की तस बनी हुई है।
हाल ही में कॉलेज प्रबंधन, छात्र व अभिभावकों के लगातार बढ़ते दबाव के बाद चारदीवारी के लिए करीब 25 लाख रुपये का बजट जारी किया गया है। लेकिन यह बजट हाईवे की तरफ खर्च नहीं होगा बल्कि इस बजट से कॉलेज के पीछे बने अंबेडकर भवन व कैंटीन की तरफ चारदीवारी का काम चल रहा है।
कॉलेज प्रबंधन की मानें तो मुख्य गेट की तरफ जमीन कॉलेज के नाम ही नहीं है। यह निजी भूमि है जिस पर कॉलेज प्रबंधन की मनमर्जी नहीं चल पा रही है। दो सालों से कॉलेज प्रबंधन कैंपस के बीचोंबीच आ रही इस जमीन को हासिल करने के लिए संघर्षरत है लेकिन जमीन पर फैसला न हो पाने की वजह से कॉलेज प्रशासन यहां किसी भी तरह का काम नहीं करवा पा रहा है।
कॉलेज गेट के पास जमीन हमारी नहीं : प्रिंसिपल
कॉलेज के मुख्य गेट के पास निजी भूमि है। जो अभी तक कॉलेज प्रबंधन के नाम नहीं हो पाई है। इसकी वजह से यहां चारदीवारी नहीं लग पा रही है। जैसे ही जमीन कॉलेज प्रबंधन को मिलेगी यहां काम शुरू कर दिया जाएगा। यह मामला फिलहाल प्रशासन के पास लंबित है।
सुमन बेदी, चंबा कॉलेज प्रिंसिपल
दोनों पक्षों से बातचीत कर निकलेगा हल : उपायुक्त
चंबा कॉलेज कैंपस में आ रही निजी भूमि पर दोनों पक्षों से बातचीत की गई है। निजी भूमि के मालिक कॉलेज के नाम जमीन हस्तांतरण को तैयार नहीं हैं। हाईवे से हादसे वाले पहलू पर प्रशासन भी विचार कर रहा है। दोबारा से जमीन के मालिकों से बातचीत होगी ताकि सकारात्मक हल निकल सके।