संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। लोगों के स्वास्थ्य को लेकर प्रदेश सरकार की संजीदगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तीन साल में बरमाणा और आसपास की चार पंचायतों के मिट्टी और पानी की जांच का सर्वे पूरा नहीं हो पाया है। मामला लोगों के स्वास्थ्य के साथ सीधा जुड़ा है।
सदर विधानसभा के बरमाणा में सीमेंट फैक्टरी के आसपास चार गांवों में 32 बच्चों के मानसिक तौर पर कमजोर होने के मामला 2020 में पहली बार सामने आया था। उसके बाद स्वास्थ्य विभाग रिपोर्ट तैयार करने में जुटा।
हालांकि उससे पहले भी साल 2019 में बीएमओ मार्कंडेय ने हरनोड़ा गांव में 11 बच्चों के मानसिक रूप से कमजोर होने की रिपोर्ट सीएमओ को सौंपी थी। हैरानी की बात यह है कि तीन साल बाद भी स्वास्थ्य विभाग यह पता नहीं लगा पाया कि किन कारणों से एक ही जगह इतने मानसिक रूप से कमजोर बच्चे पैदा हुए।
बता दें कि बैरी, बरमाणा, धौनकोठी, हरनोड़ा और आसपास के क्षेत्रों में यह मानसिक रूप से कमजोर बच्चे हैं। 2019 में सीएमओ बिलासपुर ने बीएमओ मार्कंडेय को पत्र के जरिये उक्त बच्चों की रिपोर्ट तैयार करने को कहा था। बीएमओ मार्कंडेय ने सीएमओ को रिपोर्ट सौंप भी दी थी।
तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री के दिशा-निर्देश के अनुसार बच्चों के एमआर होने के कारणों का पता लगाने के लिए मिट्टी और पानी की जांच करने के लिए विशेषज्ञों की टीम पीजीआई से प्रभावित क्षेत्रों में आनी थी। हालांकि अभी तक आदेश स्वास्थ्य विभाग की फाइलों तक ही सीमित हैं।
हैरानी का विषय यह है कि एक ही क्षेत्र में 32 बच्चे मानसिक रूप से कमजोर हैं। इनका जन्म साल 2000 के बाद हुआ लेकिन जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने इनके मानसिक तौर पर कमजोर होने के कारणों का पता लगाना जरूरी नहीं समझा।
सीएमओ बिलासपुर डॉक्टर प्रवीण चौधरी ने कहा कि 2020 में सरकार को लिखा गया था कि पीजीआई से टीम जांच के लिए बुलाई जाए लेकिन कोई जवाब नहीं आया। कहा कि वह फिर से मामले को सरकार के समक्ष रखेंगे ताकि इसके कारणों का पता लगाया जा सके।