सड़क से करीब तीन से चार किमी दूर गांव होने से अग्निशमन विभाग के वाहन मौके पर नहीं पहुंच पाए। आग से पूरे गांव में अफरा तफरी व चीख पुकार मची रही। सर्दी के मौसम में हुए अग्निकांड में काष्ठकुणी शैली के 16 मकान धू-धूकर जलकर राख हो गए हैं। इस दौरान तेज हवाएं भी चल रही थी, जिसने आग को तेजी से फैलने में घी का काम किया और देखते ही देखते एक घर के बाद दूसरे घर में आग लगती रही। आग से 4.20 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
घटना में 70 से अधिक लोग बेघर हो गए हैं। आग लगने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है।जानकारी के अनुसार सोमवार को दोपहर डेढ़ बजे झनियार गांव के कैलाश चंद पुत्र केहर सिंह की दो मंजिल गोशाला (पड़ाछा) में अचानक आग लगी। इसके बाद तेज भड़कती आग ने साथ लगते रिहायशी मकानों को अपनी चपेट में ले लिया और देखते ही देखते आग ने भयानक रूप धारण कर लिया।
आग की लपटें उठता देख गांव के लोग भी घटनास्थल की ओर दौड़े। लेकिन काष्ठकुणी शैली के बने मकान एक-दूसरे मकान से सटे होने से पूरा गांव को आग ने अपनी चपेट में लिया। आग इतनी तेजी से फैल रही थी कि कई लोगों को घरों से सामान निकालने का भी समय नहीं मिल पाया। हालांकि ऊपर की तरफ वाले मकान के परिवारों ने जैसे-तैसे सामान व अपने मवेशियों को बाहर निकाला। घटना दिन के समय हुई है अन्यथा जानमाल को बड़ा नुकसान हो सकता था। भीषण आग ने जब मकानों को अपनी तेज लपटों की चपेट में लिया तो मंजर भयानक व रौंगटे खड़े करने वाला था। चीख पुकार के बीच आसपास गांव के लोग भी घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। आग की सूचना दमकल को भी दी गई, लेकिन सड़क के अभाव से वह भी बेबस नजर आए।
आग की सूचना मिलने के बाद बंजार के एसडीएम पंकज शर्मा अपनी प्रशासनिक टीम के साथ कई किमी पैदल चलकर गांव पहुंचे और आग से हुए नुकसान का आकलन किया गया। कहा कि प्रभावित लोगों को राहत राशि सहित अन्य सामान दिया गया है। झनियार गांव में आग की भीषण घटना के बाद चारों तरफ सन्नाटा पसर गया है। डीएसपी बंजार शेर सिंह ने कहा कि आग कैसे लगी पुलिस इसकी जांच कर रही है।