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एक ही अध्यापक के सहारे चल रहा स्कूल में 200 छात्रों का भविष्य

Thu, 25 May 2017 11:36 PM IST
yamunanagar beuro
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h - फोटो : yamunanagar
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 छछरौली क्षेत्र के गांव गनौली के राजकीय माध्यमिक विद्यालय में अध्यापकों की कमी पर भड़के अभिभावकों ने गुरुवार को डीईईओ कार्यालय पहुंचे। अभिभावकों ने यहां सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। अभिभावकों का कहना था एक ही अध्यापक के सहारे स्कूल में 200 छात्रों का भविष्य चल रहा है। स्कूल में बाकी के अध्यापकों के पद रिक्त पड़े है। प्रदर्शन के बाद अभिभावकों ने जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन दिया गया।
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हरियाणा अभिभावक मंच के बैनर तले गुरुवार को गांव गनौली की दर्जनों अभिभावक जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय पर एकत्र हुई। इनमें अधिकतर महिलाएं थी। प्रदर्शन करते हुए सभी अभिभावक डीईईओ कार्यालय में धरने पर बैठ गए और नारेबाजी करने लगे। महिला सुमन, संतरा, मनजीत कौर, आशा रानी, अनीता, माया, नीलम, रीना देवी आदि ने बताया कि गांव गलौली के सरकारी स्कूल में करीब दो सौ बच्चे पढ़ते हैं। उन्हें पढ़ाने के लिए केवल एक ही अध्यापक है। अन्य सभी पद रिक्त पड़े हुए है। कई बार अधिकारियों को शिकायत दी जा चुकी है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। धरना दे रहे अभिभावकों को समझाने के लिए जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सुरेश कुमार मौके पर पहुंचे। अभिभावकों ने उन्हें ज्ञापन देकर स्कूल में पड़े सभी रिक्त पदों पर नियुक्ति करने की मांग की। डीईईओ सुरेश कुमार ने उन्हें आश्वासन दिया कि अब स्कूलों की छुट्टियां पड़ने वाली है। जुलाई में सत्र शुरू होने पर उनके स्कूल में अध्यापक नियुक्त कर दिए जाएंगे। जिसके बाद अभिभावक शांत हुए।

 
तो कैसे मिलेगी बेहतर शिक्षा
अभिभावक बबली, राजदुलारी, दया रानी, नीलम, प्राचो, सेमो, राजकुमारी, रीता देवी का कहना है कि सरकार की ओर से स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन जब स्कूलों में अध्यापक ही नहीं होंगे। तो बच्चे कैसे बेहतर शिक्षा प्राप्त करेंगे। उनका का कहना है कि स्कूल में केवल एक ही अध्यापक है। यदि स्कूल में अध्यापक नहीं होंगे, तो इसका असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ेगा। इसलिए स्कूल में शिक्षकों के सभी पद भरे जाने चाहिए।
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अध्यापकों की कमी से गिर रहा शिक्षा का स्तर
हरियाणा अभिभावक मंच के विजय पाल सिंह ने बताया कि प्राइवेट स्कूलों में शिक्षा काफी महंगी है। ऐसे में सभी अपने बच्चों को महंगे स्कूलों में नहीं पढ़ा सकते। एकमात्र रास्ता सरकारी स्कूल हैं, लेकिन वहां शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई का स्तर गिरता जा रहा है। जब अधिकारियों से इस बारे में बात की जाती है तो हर बार बोल दिया जाता है कि हमारे पास अध्यापक नहीं है। जबकि सरकार सरप्लस टीचर होने की बात कह रही है।

 
शिकायत के बाद भी नहीं होती सुनवाई
महिलाओं ने बताया कि स्कूल में रिक्त पदों को भरने को लेकर हम 29 सितंबर 2015, छह मई 2016 और 22 सितंबर 2016 को शिक्षा विभाग में शिकायत दे चुके है। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। स्कूल में साईंस, सामाजिक, संस्कृत, ड्राईंग व पीटीआई विषयों के अध्यापक ही नहीं है। एक अध्यापक ही कई विषय पढ़ाता है। जिसके चलते विद्यार्थी उक्त विषयों के अलावा शिक्षा में भी पिछड़ रहे है।

 
विद्यार्थियों को स्वर व्यंजन भी नहीं आते
धरना दे रही महिलाओं ने कहा कि अधिकतर सरकारी स्कूलों में बच्चों को एक क्लास से दूसरी क्लास में बिठा दिया जाता है। लेकिन उनको हिंदी के स्वर व व्यंजन का भी ठीक से ज्ञान नहीं है। इसके अलावा ना ही वे कोई पत्र ठीक से लिख और बोल पाते है। विद्यार्थी देश का भविष्य है। यदि नींव की कमजोर होगा तो देश का भविष्य क्या होगा।

 
गनौली गांव की कुछ महिलाएं आज कार्यालय में आई थी। स्कूल में अध्यापकों की कमी को लेकर उन्होंने मांग रखी। स्कूलों की छुट्टियां के बाद जुलाई में सत्र शुरू होने पर स्कूल में रिक्त पड़े अध्यापकों के पदों पर नियुक्ति की जाएगी।
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-सुरेश कुमार, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी यमुनानगर।
 
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