हरियाणा के सभी ऐतिहासिक गुरुद्वारों का प्रबंधन पूरी तरह कंप्यूटराइज्ड हाेगा। गुरुद्वारों के चढ़ावे, जमीनों से होने वाली कमाई और खर्च को ऑनलाइन किया जाएगा। गुरुद्वारों में कड़ाह प्रसाद की रसीद भी कंप्यूटराइज्ड होगी। इस काम में पूरी पारदर्शिता रखी जाएगी और संगत कभी भी इसे चेक कर सकती है।
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अधीन हरियाणा के सभी ऐतिहासिक गुरुद्वारों की सेवा संभाल अब पूरी तरह से हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक एडहाॅक कमेटी के हाथों में आ गई है। जानकारों के मुताबिक इन ऐतिहासिक गुरुद्वारों में सालाना 100 से 120 करोड़ रुपये इकट्ठे होते हैं।
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जमीनों से होने वाली कमाई का रिकाॅर्ड भी ऑनलाइन होगा
अब इस धनराशि का हिसाब हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक एडहॉक कमेटी के हाथ में होगा। इन गुरुद्वारों की सेवा संभाल के लिए एडहॉक कमेटी की क्या प्राथमिकताएं रहेंगी, इस विषय पर एडहॉक कमेटी के प्रधान महंत कर्मजीत सिंह से बातचीत की गई।
गुरुद्वारों का प्रबंधन होगा कंप्यूटराइज्ड
प्रधान कर्मजीत सिंह ने बताया कि हरियाणा के सभी ऐतिहासिक गुरुद्वारों का प्रबंधन पूरी तरह कंप्यूटराइज्ड हाेगा। गुरुद्वारों के चढ़ावे, जमीनों से होने वाली कमाई और खर्च को ऑनलाइन किया जाएगा। गुरुद्वारों में कड़ाह प्रसाद की रसीद भी कंप्यूटराइज्ड होगी। इस काम में पूरी पारदर्शिता रखी जाएगी और संगत कभी भी इसे चेक कर सकती है।
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गुरुद्वारों में कड़ाह प्रसाद की रसीद होगी कंप्यूटराइज्ड, नई सरायों का निर्माण भी होगा
उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक गुरुद्वारों में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए जहां-जहां सराय बनी है, उनमें कई की हालत काफी दयनीय है। एडहॉक कमेटी के एग्जीक्यूटिव मेंबर की जनरल हाउस मीटिंग में इन सरायों के लिए प्रस्ताव रखा जाएगा। इसकी मंजूरी के बाद सरायों की नए सिरे से मरम्मत कराई जाएगी। जहां जरूरत होगी, वहां नई सराय बनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि एडहाॅक कमेटी का हेड ऑफिस कुरुक्षेत्र में बनाया जाएगा।
महंत कर्मजीत सिंह ने कहा कि हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक एडहॉक कमेटी के लिए अब कोई विरोध नहीं है। हरियाणा में जो इसका विरोध कर रहे थे, वे सभी हमारे साथ हैं। हरियाणा की अलग गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी बनाने में जिन्होंने संघर्ष किया है, उन्हें साथ लेकर काम करेंगे। उन्होंने सभी सिख संगत से शांति बनाए रखने की अपील भी की।