यमुनानगर। पिछले साल कोरोना संक्रमण के कारण कहीं भी रामलीला नहीं हो पाई थी, लेकिन इस बार प्रशासन की ओर से रामलीला मंचन की अनुमति दी गई है। इसे लेकर जिले में कई जगहों पर रामलीला का मंचन शुरू हो गया है। परंतु प्रशासन की ओर से रामलीला मंचन की अनुमित बहुत देरी से दी गई है। इस कारण अधिकांश समितियों ने मंचन इस बार स्थगित कर दिया है। चूंकि देरी से अनुमति मिलने के कारण समितियों का बजट नहीं बन पाया है। जिले में अधिकांश कार्यक्रम सामाजिक चंदे से किए जाते हैं। मंचन के लिए चंदा छह माह पहले ही एकत्र किया जाने लगता है परंतु संक्रमण के कारण इस बार चंदा एकत्र नहीं किया जा सका।
वहीं समितियों को सबसे बड़ी परेशानी कलाकार नहीं मिलना है। प्रशासन की ओर से सितंबर के अंतिम सप्ताह तक अनुमति नहीं दी गई थी। इस कारण समितियों ने पेशेवर कलाकारों की बुकिंग नहीं की थी। अनुमति मिलने के बाद कलाकार नहीं मिल पाए। उधर, समिति सदस्यों व स्थानीय निशुल्क रूप से किरदार निभाने वाले कलाकारों को अभ्यास का समय नहीं मिला। ऐसे में अधिकांश समितियों ने मंचन कार्यक्रम स्थगित कर दिया।
78 साल से रामलीला का मंचन करती आ रही रेलवे स्टेशन के पास स्थित पुरानी सब्जी मंडी की कैटल कंपाउंट रामलीला कमेटी के मंच सचिव मुकेश सैनी ने बताया कि रामलीला मंचन में धन और समय दोनों की आवश्यकता होती है। मंच में सात से आठ लाख रुपये का खर्च आता है। वहीं किरदार निभाने वाले कलाकारों को भारी बंदिशों व नियमों में रहना होता है। ऐसे में समय बहुत कम होने कारण इस बार उन्होंने मंचन स्थगित कर दिया है। शहर में मात्र जगाधरी में रामलीला का मंचन किया जा रहा है।
ताड़का वध से श्रीराम के जयघोष से गूंजा क्षेत्र
बिलासपुर। गांव छलौर में श्रीरामलीला क्लब की ओर से करवाई जा रही रामलीला में ताड़का वधन का मंचन किया गया। रामलीला का शुभारंभ भगवान श्रीराम के बाल्य काल से किया गया। इस दौरान भगवान श्रीराम के विद्याध्ययन का दृश्य दिखाया गया। ऋषि मुनियों की रक्षा के लिए प्रभु श्रीराम की ओर से ताड़का सुबाहु वध का मंचन किया गया है। रामलीला में जय प्रकाश कांबेाज, शिव दत कांबोज, पवन वर्मा, रोनकी राम, सतीश कांबोज, कंवरपाल, मांगे राम ने विभिन्न पात्रों का किरदार निभाया।
इस दौरान दिखाया कि राक्षसों की प्रताड़ना से दुखी ऋषि मुनियों ने रक्षा के लिए मुनि विश्वामित्र से गुहार लगाई। इस पर मुनि विश्वामित्र महाराजा दशरथ के दरबार में पहुंचे। राजा दशरथ उन्हें राज सिंहासन पर विराजमान करवाते हैं। फिर श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न को बुलाकर मुनि विश्वामित्र का आशीर्वाद दिलाते हैं। विश्वामित्र धर्म की राक्षसों से रक्षा के लिए श्रीराम और लक्ष्मण को साथ भेजने के लिए कहते हैं। काफी तर्क-वितर्क के बाद राजा दशरथ श्रीराम व लक्ष्मण को विश्वामित्र के साथ जाने की आज्ञा देते हैं।
जंगल में ऋषियों के आश्रम के समीप श्रीराम व लक्ष्मण को देखते ही ताड़का राक्षसी हुंकारते हुए उन पर प्रहार करती है। भगवान श्रीराम के एक ही बाण से उसका वध कर देते हैं। इसके बाद श्रीराम मुनि विश्वामित्र से भूख प्यास से विचलित न होने एवं बल प्राप्ति की मंत्र विद्या प्रदान करते हैं। वहीं ऋषियों से निर्भय होकर यज्ञ करने को कहते हैं। ताड़का का पुत्र मारीछ सेना लेकर श्रीराम से युद्ध करने पहुंचता है। श्रीराम के बाण के प्रहार से वह समुद्र पार लंका में जा गिरता है। भगवान श्रीराम सुबाहु का भी उसकी सेना सहित वध कर देते हैं। महा बलशाली ताड़का, मारीछ व सुबाहु का संहार होने पर आकाश से देवता भगवान श्रीराम की जयघोष कर पुष्प वर्षा करते हैं। मंचन देखकर सभी लोगों ने भगवान श्रीराम का जयघोष और राम लखन को नमन किया।
रामजन्म पर अयोध्या में गाए गए मंगल गीत
जठलाना। गांव नाचरौन में न्यू ग्रामीण रामा ड्रोमेटिक क्लब की ओर से करवाई जा रही रामलीला में भगवान श्रीराम जन्म का मंचन किया गया। इस मौके पर मंगल गीत गाए गए।
रामलीला का शुभारंभ रादौर विधायक डॉ. बीएल सैनी ने रिबन काटकर किया। रामलीला में दूसरे दिन दिखाया गया कि सभी देवी-देवताओं ने क्षीर सागर में जाकर भगवान विष्णु से अवतरित होने की प्रार्थना की। जिसके बाद विश्वामित्र के कहने पर श्रंगी ऋषि ने पुत्रेष्टि यज्ञ किया और महाराजा दशरथ को पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया। वरदान अनुसार दशरथ की तीनों रानियां कौशल्या, कैकेयी व सुमित्रा ने पुत्रों को जन्म दिया।
चारों भाइयों के जन्म पर अयोध्या में मंगल गीत गाए गए। इसके अलावा राजा दशरथ ने दरबार में श्रंगी ऋषि का आना, राजा दशरथ का पुत्र प्राप्ति यज्ञ, राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न का जन्म, सुबाहु मारीच द्वारा राहगीरों को लूटना, सुबाहु मारीच द्वारा विश्वामित्र का यज्ञ भंग की कथा का मंचन किया गया।
ताड़का संहार के लिए राम लखन को संग ले जाते मुनी विश्वामित्र।- फोटो : Yamuna Nagar
गांव नाचरौन में आयोजित रामलीला में प्रस्तुति देते कलाकार।- फोटो : Yamuna Nagar