संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। निजी स्कूलों की मनमानी अभिभावकों और बच्चों की परेशानी बनी हुई है। विभाग की ओर से स्कूल लगने का समय सुबह सात बजे से दोपहर 12 बजे तक निर्धारित किया गया है। फिर भी निजी स्कूल 12 बजे की बजाय साढ़े 12 बजे या फिर 12 बजकर 45 मिनट पर विद्यार्थियों की छुट्टी कर रहे हैं।
स्कूल से बाहर निकलने में ही बच्चों को 12 मिनट और लग जाते हैं। जैसे ही विद्यार्थी स्कूल के गेट पर आते हैं तो उनके चेहरों के हाव-भाव से को देखकर सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह गर्मी से कितने परेशान हैं। अमर उजाला ने शुक्रवार को शहर के बड़े निजी स्कूलों में जाकर पड़ताल की तो ऐसी ही हकीकत सामने आई। हालांकि कुछ स्कूल ऐसे भी थे जो नियमानुसार दोपहर 12 बजे ही स्कूलों की छुट्टी कर रहे हैं।
स्वामी विवेकानंद स्कूल सेक्टर-17 : टीम ठीक 12 बजे स्कूल के गेट पर पहुंची। स्कूल के बाहर सन्नाटा पसरा हुआ था। स्कूल के कर्मचारी ने पूछने पर बताया कि गर्मी की वजह से छोटे बच्चों की छुट्टी 11 बजे हो जाती है। जबकि बड़े बच्चों की छुट्टी साढ़े 12 बजे होगी। टीम ने यहां इंतजार किया। साढ़े बजने से पहले ही स्कूल के सामने सेक्टर की सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। विद्यार्थी गर्मी से बेहाल दिखे। छुट्टी के बाद स्कूल के बाहर 20 मिनट तक जाम लगा रहा। सिर पर पड़ रही सीधी धूप से हर कोई परेशान था। स्कूल या पुलिस की तरफ से यहां जाम खुलवाने का कोई प्रबंध नहीं किया गया था।
एसडी पब्लिक स्कूल जगाधरी : यहां दोपहर 12 बजकर सात मिनट पर स्कूल की पहली बस छोटे बच्चों लेकर रवाना हुई। एक के बाद एक कई बसें निकलती हैं। यहां भी बड़े बच्चों की छुट्टी साढ़े 12 बजे होने की बात बताई गई। इसके ठीक सामने एसडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल है। उसके गेट पर साढ़े 12 बजे अभिभावक बच्चों के बाहर आने का इंतजार कर रहे थे। देखते ही देखते 12 बजकर 35 मिनट पर बच्चे बाहर आने शुरू हुए। दोनों स्कूलों के सैकड़ों बच्चे बाहर आने से सड़क पर जाम लग गया। जाम में फंसने के कारण बच्चों के साथ-साथ अभिभावक भी गर्मी से बेहाल दिखे। कुछ बच्चे ऐसे भी दिखे जिन्होंने गर्मी से बचने के लिए सिर पर कपड़ा लपेट रखा था।
संत थॉम्स स्कूल जगाधरी : संत थॉम्स स्कूल जगाधरी के बाहर सवा 12 बजे से पहले ही लंबा जाम लगा था। स्कूल की छुट्टी निर्धारित समय पर दोपहर 12 बजे हो चुकी थी। इस दौरान छोटे बच्चों को ले जा रहे दो बसें 15 मिनट तक पुलिया के पास जाम में फंसी रही। बस में सवार बच्चे रुमाल से पसीना साफ कर रहे थे। ऐसे में आसपास के दुकानदार आगे आए। उन्होंने वाहनों को आगे-पीछे करके जाम को खुलवाया। यहां भी जाम में गर्मी ने लोगों का दम निकाल कर रखा था। स्कूल के सामने ही कुछ बच्चे बोतल से पानी पीते व आइसक्रीम खाते दिखे।
संत निश्चल सिंह पब्लिक स्कूल : यहां भी दोपहर सवा 12 बजे केवल छोटे बच्चे ही स्कूल के गेट पर खड़े मिले। बच्चों को ले जाने के लिए अभिभावकों ने ऑटो रिक्शा, वैन व रिक्शा लगा रखे हैं। छोटे-छोटे वाहनों में क्षमता से ज्यादा बच्चों को बैठाया जा रहा था। इन वाहनों में बच्चे बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं, फिर भी स्कूल या प्रशासन का ध्यान इस तरफ नहीं है।
सनराइज स्कूल प्रतापनगर : यहां भी स्कूल नियमों पर खरा उतरता मिला। स्कूल के सभी बच्चों की छुट्टी दोपहर 12 बजे हो चुकी थी। छुट्टी के बाद बच्चों को बस में बिठाकर रवाना किया गया। स्कूल की प्रधानाचार्या परमजीत संधू ने बताया कि शिक्षा विभाग के समय अनुसार ही बच्चों को बुलाया व छुट्टी की जा रही है। गर्मी से बचाव के लिए स्कूल में पंखों व जनरेटर की व्यवस्था की गई है।
नियम तोड़ने वालों पर हो कार्रवाई:
अभिभावक कंवरपाल, आशीष, अंकुश व हाजी शौकत ने बताया कि इस वक्त गर्मी बहुत ज्यादा है। एक तो सुबह सात बजे से पहले ही बच्चों को उठाने व तैयार करने में दिक्कत आ रही है। वहीं दोपहर को भी छुट्टी 12 की बजाय साढ़े 12 बजे की जा रही है। घर पहुंचने में ही आधा से एक घंटा लग जाता है। यह कहने को समय बदला गया है, लेकिन दोपहर को बच्चे फिर भी गर्मी से बेहाल हैं। देरी से छुट्टी करने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
लू से बच्चों को बचाना जरूरी : राजीव दुआ
डाक्टर राजीव दुआ का कहना है कि गर्मी में लू से बचाव के लिए बच्चों को तरल पदार्थ ज्यादा दें। बच्चों को रात में जल्दी सोने को कहें ताकि उनकी नींद पूरी हो सके। बच्चों को आठ से नौ घंटे की नींद लेनी चाहिए। नींबू पानी व ओआरएस का घोल पिलाना चाहिए। लू से बचने के लिए आंखों पर काला चश्मा लगाए। सिर को सूती कपड़े से ढक कर रखें। गर्मी को देखते हुए दिन में कम से कम दो से तीन बार जरूर नहाएं।
जिसने नियम तोड़ा कार्रवाई होगी: सतपाल कौशिक
दोपहर 12 बजे के बाद बच्चों को स्कूल में रोकना गलत है। यदि किसी स्कूल में 12 बजे के बाद बच्चे मिले तो उस पर सख्त कार्रवाई होगी। वह जल्द ही स्कूलों का औचक निरीक्षण कर इसकी हकीकत पता करेंगे।
सतपाल कौशिक जिला शिक्षा अधिकारी