यमुनानगर। मांगों के समर्थन में वीरवार को एनएचएम कर्मियों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो गईं। हड़ताल के चलते स्वास्थ्य केंद्रों पर ताले लटके रहे। जिस कारण मरीज व तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ा। उपचार न मिलने से कई तीमारदार अपने मरीज को वापस घर ले गए। सिविल अस्पताल यमुनानगर व जगाधरी में तो किसी तरह ओपीडी में मरीजों की जांच होती रही लेकिन शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य केंद्रों पर ताले लटके रहे। वहीं, स्वास्थ्य कर्मचारी संघ हरियाणा संबंधित भारतीय मजदूर संघ के आह्वान पर एनएचएम कर्मचारियों ने हड़ताल के दौरान सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर टेंट लगाकर धरना प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने लंबित मांगों को पूरा कराए जाने के समर्थन में नारेबाजी की।
जिले में एनएचएम के 490 कर्मचारी
जिले में एनएचएम के कुल 490 कर्मचारी हैं। यूनियन ने इनमें से 480 के हड़ताल पर रहने का दावा किया। इनमें करीब 100 डॉक्टर, 150 एएनएम, 150 स्टाफ नर्स व बाकी लैब टेक्नीशियन, एंबुलेंस चालक व फार्मासिस्ट हैं। सभी कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से स्वास्थ्य सुविधाएं बाधित हो गई। ग्रामीण क्षेत्र के सभी डिस्पेंसरी पर ताला लगा रहा। मरीज आते रहे और बिना दवाई के लौटते रहे। सिविल अस्पताल में जहां ओपीडी की पर्ची बनती है वहां भी अन्य दिनों की अपेक्षा जल्दी ही सन्नाटा पसर गया। हड़ताल की वजह से विभाग ने एंबुलेंस भी ठेके पर रखे कर्मचारियों से ही चलवाई। लैब में मरीजों के सैंपल नहीं लिए जा सके। इतना ही नहीं गर्भवती महिलाओं को प्राथमिक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों व आंगनबाड़ी केंद्रों में जो टीके लगाए जाते थे वह भी नहीं लग पाए। काफी लोगों को पहले ही पता चल गया था कि वीरवार को कर्मचारियों की हड़ताल है, इसलिए उनमें से बहुत से सिविल अस्पताल में दवाई लेने ही नहीं पहुंचे।
कर्मचारी बोले- मांगे नहीं मानी तो लेंगे बड़ा फैसला
स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं प्रदेश संगठन मंत्री विजय कांबोज ने कहा कि एनएचएम कर्मचारियों के हड़ताल होने की वजह से पूरे स्वास्थ्य विभाग में कोई काम नहीं हुआ। कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणाओं और कर्मचारियों की बाकी मांगों के पत्र जारी नहीं किए गए तो स्वास्थ्य कर्मचारी संघ भारतीय मजदूर संघ के साथ बड़ी बैठक कर अनिश्चितकालीन हड़ताल जैसे बड़े निर्णय की घोषणा भी कर सकते हैं। जिला अध्यक्ष डॉ. मधु धीमान ने कहा कि सरकार अगर अपनी ही घोषणा को समय रहते पूरा नहीं करेगी तो कर्मचारियों का आक्रोशित होना स्वाभाविक है।
इस मौके पर भारतीय मजदूर संघ के जिला अध्यक्ष मनोज कुमार, अर्बन प्रधान राजेश सैनी, कार्यकारी अध्यक्ष गुलशन सैनी, जिला मंत्री अनजाना, नाहरपुर के प्रधान देशवीर, सरस्वतीनगर की प्रधान शालिनी, कैशियर मोहित, डॉ. ओनिका, डॉ. रिषभ, डॉ. मान, सोनिया, सतपाल, डॉ. शिव, डॉ. आयुष, दलजीत, डॉ. धीरज चावला, डॉ. अश्वनी, पूजा, अमित, डॉ. अनुराधा, डॉ. आशु, पंकज व अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
यह हैं एनएचएम कर्मचारियों की कुछ मांगें
- मुख्यमंत्री ने दो नवंबर 2021 को एनएचएम कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग का लाभ देने की घोषणा की थी। अब तक इसका लाभ नहीं मिला है। सरकार जल्द इसका पत्र जारी करे।
- एनएचएम की सर्विस बायलाज की वेतन विसंगतियों को जल्द दूर किया जाए।
- कोरोना प्रोत्साहन राशि 5000 रुपये सभी कर्मचारियों को जल्द दी जाए।
- सर्व शिक्षा अभियान की तर्ज पर एनएचएम कर्मचारियों को ग्रेच्युटी का लाभ दिया जाए।
- एनएचएम कर्मचारियों को कैशलेस मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
- एनएचएम में कार्यरत चिकित्सा अधिकारियों को सेवा नियमों का लाभ दिया जाए। प्रारंभिक वेतन 80 हजार रुपये किया जाए।
- एनएचएम कर्मचारियों को 58 वर्ष तक गेस्ट अध्यापकों की तर्ज पर सेवा सुरक्षा प्रदान की जाए।
- एनएचएम कर्मचारियों का वर्ष 2017 व 2019 में आंदोलन व हड़ताल के दौरान काटा गया वेतन एमपीएचई हड़ताल आंगनबाड़ी हड़ताल की भांति अवकाश मानकर वेतन जल्द जारी किया जाए।
- प्रत्येक जिले में जिला कष्ट निवारण समिति बनाई जाए और इसमें संघ के दो प्रतिनिधि शामिल किए जाएं।
- एनएचएम में आउटसोर्सिंग पॉलिसी के तहत लगाए गए कर्मचारियों को एनएचएम में शामिल किया जाए।
NHM workers strike: Health services crippled- फोटो : Yamuna Nagar