गांव मारवा खुर्द में बच्चों की सुरक्षा को लेकर परेशान बैठी ऊषा कमल व उनके पति सिया राम।
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यमुनानगर। यूक्रेन के इवानों में फंसे जिले के छात्र शनिवार को टैक्सी के माध्यम से रोमानिया बॉर्डर पर पहुंच गए। इन छात्रों ने सेल्फी लेेकर घर भेजी है। इससे परिजनों ने राहत की सांस ली है। भारत के विशेष विमानों में बिठाकर उन्हें रोमानिया से वापस लाया जाएगा। कुछ छात्र अभी इवानो, खारकीव और अन्य जगहों पर अभी फंसे हुए हैं। फिलहाल उन्हें वापस लाने में थोड़ा वक्त लग सकता है।
रोमानिया और पोलैंड के बॉर्डर पर काफी संख्या में छात्र पहुंच रहे हैं, जो छात्र यूक्रेन से निकले हैं उनके चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी क्योंकि तीन-चार दिन से वह डर के साये में जी रहे थे। रोमानिया बॉर्डर पर सभी छात्र सुरक्षित हैं। बॉर्डर से उन्होंने सेल्फी लेकर अपने परिजनों को भेजी। जिसे देखकर परिजनों केे काफी राहत मिली। गांव लाल छप्पर के अनिल कुमार ने बताया कि उनका बेटा अंकुर इवानो में थे। उन्हें बताया गया था कि शनिवार को उन्हें सुबह नौ बजे बस में बिठाकर रोमानिया भेजा जाएगा परंतु शाम छह बजे तक भी बस उन्हें लेने नहीं पहुंची थी। फिर भी अंकुर अपने कुछ साथियों के साथ शुक्रवार रात को ही टैक्सी के माध्यम से निकल गया था। वह रोमानिया बॉर्डर पर पहुंच गया है। रोमानिया में इंटरनेट सुविधा नहीं मिलने से उनसे बात भी नहीं हो पा रही है हालांकि शाम को छह बजे उनकी आखिरी बात बात हो गई थी।
बिलासपुर क्षेत्र के काफी बच्चे यूक्रेन में फंसे
गांव मारवा खुर्द निवासी एवं राजकीय स्कूल मछरौली के अध्यापक सियाराम का बेटा और बेटी दोनों यूक्रेन के खारकीव में फंसे हुए हैं। दोनों वहां से एमबीबीएस कर रहे हैं। परिजनों को ज्यादा चिंता इसलिए हो रही है कि क्योंकि खारकीव रूस बॉर्डर के नजदीक है। उन्होंने दोनों बच्चों सेे शनिवार को फोन पर बात की। सियाराम और उनकी पत्नी ऊषा कमल ने बताया कि उनकी बेटी सुनीर और बेटा सुनीत खारकीव की वीएन क्रॉजिन यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की पढ़ाई करने गए थे। कुछ दिनों से यूक्रेन के हालात से उन्हें बच्चों की दिन-रात चिंता सता रही है। बच्चों ने फोन पर बताया था कि वह बहुत डरे हुए हैं। अन्य छात्रों के साथ बंकर में छिप कर समय व्यतीत कर रहे हैं। केवल खाना खाने के लिए हॉस्टल की कैंटीन तक बहुत मुश्किल से पहुंचते है। खाना भी काफी मशक्कत के बाद मिल रहा है।
परिजन बार-बार फोन पर ले रहे जानकारी
गांव अहड़वाला निवासी हाकम जटियान ने बताया कि उनका बेटा रेस्पी तीन वर्ष पूर्व यूक्रेन के इवानो में एमबीबीएस की पढ़ाई करने गया था। दिन में कई बार बेटे के साथ वीडियो काल कर उसका हालचाल पूछ रहे हैं। बेटे ने उन्हें बताया है कि उनके साथ के 50 बच्चों ने बस किराये पर ली है जो उन्हें रोमानिया तक ले जाएगी। प्रतिदिन शाम होते ही सायरन की आवाज से साथ ब्लैक आउट हो जाता है। आसपास बाजार, माल व अन्य जगह पूरी तरह से बंद हैं। एक सप्ताह पूर्व उनकी यूनिवर्सिटी से कुछ किलोमीटर दूरी पर मिसाइल से हमला हुआ था। हालांकि इसमें कोई हताहत नहीं हुआ था। हाकम सिंह ने बताया कि उसने बेटे की वापसी के लिए 70 हजार रुपये में हवाई जहाज की टिकट बुक करवाई थी। उन्हें बेटे की वापसी को लेकर दिनरात चिंता सता रही है।