संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। डीएपी वह खाद है, जिसकी सबसे ज्यादा आवश्यकता गेहूं की बिजाई के तुरंत बाद होती है। इसके बाद यूरिया खाद डाली जाती है। पहले खेतों में पसीना बहाने वाले किसानोें को अब डीएपी की 50 किलो पीली पन्नी को पाने के लिए घंटों लाइन में खड़ा होना पड़ रहा है। इस दौरान उसे खाद मिलेगी भी या नहीं उसकी कोई गारंटी नहीं। हालात यह हो गई गैस सिलेंडर की तरह डीएपी लेने के लिए किसानों को लंबी-लंबी लाइनों में लगना पड़ रहा है।
अग्रसेन चौक स्थित गोदाम से डीएपी खाद बांटी जा रही है। डीएपी लने किसान सुबह ही आ जाते हैं। डीएपी मंगलवार को भी बांटी गई। काफी देर तक लाइन में लगने के बाद भी बड़ी संख्या में किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ा। ऐसे में उन्हें बुधवार को आने का समय दिया गया। किसान रघुबीर, श्याम लाल व सोमनाथ ने बताया कि वे लोग तीन घंटे लाइन में लगे इसके बाद भी खाद नहीं मिली।
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट) के जिला अध्यक्ष सुभाष गुर्जर का कहना है। हर साल डीएपी खाद की यही हालात होती है। सरकार किसानों की समस्याओं को जानने का नाम नहीं ले रही। केवल चहेतों को ही खाद को पहले दी जा रही है। अन्य किसान घंटों लाइन में खड़े रह जाते हैं। इससे बाद भी डीएपी नहीं मिलती है।
क्या है डीएपी खाद
डीएपी खाद कृषि में उपयोग होने वाली क्षारीय प्रकृति का रासायनिक उर्वरक में से एक है। इसका पूरा नाम डाई अमोनियम फास्फेट है। इससे पौधों में पोषण के लिए नाइट्रोजन एवं फास्फोरस की कमी पूरी करने के लिए सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है, इसमें 18 फीसदी नाइट्रोजन, 46 फीसदी फास्फोरस होता है। इस उर्वरक का मुख्य उपयोग पौधों की जड़ों के विकास के लिए किया जाता है। बाद में यूरिया डाली जाती है। डीएपी एक एकड़ में एक ही बैग डाली जाती है। डीएपी का मौजूदा कीमत लगभग 1200 रुपये है, जबकि यूरिया का दाम 270 से 280 रुपये प्रति बैग है।