टोपरा कलां गांव का नाम अरेबिक भाषा में टोप से चलता है। इसी नाम से अफ़गानिस्तान में एक जगह भी है, जो स्तूप था, वह गुंबद के आकार का होता था। गांव टोपरा कलां में भी उस जमाने में बौद्ध स्तूप गुंबद की तरह था, इसलिए इस गांव का नाम टोपरा कलां रखा गया था। गांव में रामकुंडी जगह पर आज भी ऐतिहासिक चीजें निकलती रहती हैं। विदित हो कि गांव टोपरा कलां से मौर्य काल के प्राचीन बर्तन के अवशेष पहले प्राप्त हुए हैं। गांव के अलग-अलग स्थानों और तालाब के पास से भी प्राचीन ईंटें निकलती हैं, जो ये स्पष्ट करता है कि इस पूरे गांव में छोटे-बड़े कई स्तूप रहे होंगे।
फाउंडर के अनुसार
फिरोजशाह तुगलक जिस काठ और पुली के माध्यम से अशोक स्तंभ को टोपरा कलां से लेकर गया था। उसी तर्ज पर भारत में पहली बार काठ व पुली का निर्माण किया जाएगा। इसका प्रपोजल तैयार कर लिया गया है। इसे अशोक पार्क में भी कारीगरों द्वारा तैयार किया जाएगा। इस पर 40 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ ही ऐतिहासिक धरोहर भी संरक्षित हो सकेगी। -सिद्धार्थ गौरी, फाउंडर, अशोका पार्क डेवलपमेंट ट्रस्ट।