हरियाणा के यमुनानगर में लघु सचिवालय में गुरुवार को हुई जिला लोक संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक में मंच पर एक कोने में बैठाए जाने से रादौर से कांग्रेस विधायक डॉ. बीएल सैनी नाराज हो गए। उनकी नाराजगी इतनी बढ़ गई की वह कष्ट निवारण समिति की बैठक को छोड़ कर वहां से चले गए। इसके बाद नगर निगम के मेयर मदन चौहान उन्हें रोकने के लिए नीचे गए। मेयर विधायक का हाथ पकड़ कर सभागार में लाए। बीएल सैनी को यमुनानगर विधायक घनश्याम दास अरोड़ा के साथ वाली कुर्सी पर बैठाया गया।
बैठक की अध्यक्षता जिला सचिवालय के सभाकक्ष में शहरी स्थानीय निकाय मंत्री डॉ. कमल गुप्ता को करनी थी। मंच पर मंत्री समेत नौ कुर्सियां लगाई गई थी। मंत्री के साथ यमुनानगर विधायक घनश्याम दास अरोड़ा, डीसी पार्थ गुप्ता, निगम मेयर मदन लाल, भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश सपरा, व्यापारी कल्याण बोर्ड के चेयरमैन रामनिवास गर्ग, समाज कल्याण बोर्ड की चेयरपर्सन रोजी मलिक आनंद, जजपा जिलाध्यक्ष अर्जुन सिंह बैठे थे।
सबसे कोने में विधायक बीएल सैनी व साढौरा से कांग्रेस विधायक रेनू बाला की कुर्सी लगी थी। रेनू बाला हर बार की तरह इस बार भी बैठक में नहीं पहुंची। बीएल सैनी ने जब अपनी नेम प्लेट को एक कोने में रखे देखा तो वह तैश में आ गए। सैनी ने कहा कि एक विधायक को कोने में बैठाना यह उनका अपमान है।
विधायक बीएल सैनी को बाद में यमुनानगर विधायक घनश्याम दास अरोड़ा के साथ बैठाया गया।
ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि वह विपक्ष के विधायक हैं। प्रोटोकोल के अनुसार उनकी कुर्सी मंत्री या फिर सत्ता पक्ष के विधायक के साथ होनी चाहिए। जनता ने उन्हें भी विधानसभा में भेजा है। इतना कहने के बाद वह नीचे चले गए। इससे सभागार का माहौल गरमा गया।
मेयर मदन लाल उन्हें लेने के लिए नीचे चले गए। विधायक को लाया गया तो मंच पर बैठे व्यापारी कल्याण बोर्ड के चेयरमैन रामनिवास गर्ग मंच से चले गए। जिस कुर्सी पर पहले रामनिवास गर्ग बैठे थे अब उस पर मेयर बैठ गए।
बैठक के बाद कहा मैं मीटिंग से संतुष्ट नहीं हूं
बैठक खत्म होने के बाद डॉ. बीएल सैनी नीचे उतरे तो उन्होंने कहा कि मैं इस बैठक में हुई कार्यवाही से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हूं। इसमें लोगों को इंसाफ नहीं मिलता। जो लोग शिकायतें लेकर आए उनकी बात को ठीक से सुना नहीं जाता। सभी परिवादों को मंत्री निपटाने में लगे रहे।
विकास कार्यों के साथ-साथ बैठक में बैठाने तक में भी भेदभाव किया जाता है। मैं सीनियर विधायक हूं। तीसरी बार एमएलए बना हूं। बैठक में सत्ता पक्ष का विधायक मंत्री के साथ बैठता है और विपक्ष का एक कोने में। इसलिए वह विरोध स्वरूप बैठक को छोड़ कर आ गए थे।