महर्षि वेद व्यास की कर्मस्थली बिलासपुर में प्रत्येक वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित होने वाले कपाल मोचन मेले को कोविड-19 की विश्वव्यापी महामारी के चलते इस वर्ष भी यह मेला आयोजित नहीं होगा व स्थगित रहेगा। जिसके चलते स्थानीय लोगों में रोष बना हुआ है। सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं के पदाधिकारियों का कहना है कि 5 हजार से ज्यादा लोगों का रोजगार प्रभावित होगा। जिससे करीब 50 करोड़ का नुकसान होगा। वहीं बर्तन बाजार को भी करीब दस करोड़ का नुकसान होगा। हरियाणा उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेशाध्यक्ष महेंद्र मित्तल का कहना है कि मेले को स्थगित करना सही नहीं है।
वहीं एसडीएम जसपाल सिंह गिल ने बताया कि उपमंडल बिलासपुर में कपाल मोचन व आदिबद्री मेला का आयोजन कार्तिक मास में किया जाता है। जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालु भारतवर्ष के विभिन्न राज्यों से आते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा कोविड-19 को एक महामारी घोषित किया है, जो कि एक संक्रमण का रोग है। श्राइन बोर्ड के गैर सरकारी सदस्यों, विभिन्न धार्मिक संस्थाओं के गणमान्य व्यक्तियों एवं अन्य संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श उपरांत आमजन के स्वास्थ्य एवं हितों को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष भी मेले का आयोजन न किया जाने का निर्णय लिया गया है।
उन्होंने वीरवार को कपाल मोचन मेले के एरिया में रिपेयरिंग के होने वाले कार्यों व सरोवरों से पानी निकाल कर साफ सफाई के कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि तीनों सरोवरों का पानी निकालना शुरू कर दिया गया है, पानी निकालने के बाद सभी सरोवरों की सफाई की जाएगी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि जहां पर दीवार की रिपेयरिंग की जरूरत है उसे ठीक करें ताकि लावारिस पशु अंदर न आएं। इस मौके पर श्राइन बोर्ड से पंकज अग्रवाल व विकास, सूचना केंद्र सहायक शमशाद अली व अन्य कर्मचारी भी उपस्थित थे।