संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। मानी गईं मांगें लागू न करने पर कर्मचारियों में भारी रोष है। इसी कड़ी में बुधवार को आंगनबाड़ी वर्कर्स एंड हेल्पर्स यूनियन की ओर से जिलास्तरीय प्रदर्शन किया गया। वर्कर्स ने सरकार के खिलाफ गरजते हुए शहर में जुलूस निकाला और महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्री कमलेश ढांडा के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपा।
आंगनबाड़ी वर्कर और हेल्पर भाई कन्हैया साहिब चौक स्थित पार्क के पास एकत्र हुए। यहां वर्कर्स ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन और नारेबाजी की। पार्क से कर्मचारी जुलूस निकालते हुए लघु सचिवालय स्थित डीसी कार्यालय पहुंचे। यहां पदाधिकारियों ने 15 सूत्रीय मांगपत्र महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्री कमलेश ढांडा के नाम एसडीएम सुशील कुमार को सौंपा।
अगुवाई मुस्तफाबाद खंड प्रधान दयावंती ने की। प्रदर्शन में करनाल से पहुंची राज्य उपप्रधान रूपवती राणा ने कहा कि मांगों और समस्याओं को लेकर सरकार से कई बार बातचीत की गई। इस दौरान सरकार ने वर्कर्स की कई मांगें मानी थीं और जल्द ही लागू करने का आश्वासन दिया था। सरकार ने मानी हुईं मांगों पर अब तक अमल नहीं किया। रूपवती ने कहा कि यह आंदोलन तीन दिन चलेगा। इसके बाद भी सरकार ने मांगें न मानी तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
आंगनबाड़ी वर्कर्स के प्रदर्शन को सर्व कर्मचारी संघ, सीटू ने समर्थन दिया। एसकेएस प्रधान महिपाल सोढे, जिला सचिव गुलशन भारद्वाज, खंड प्रधान जोत सिंह सहित अन्य पदाधिकारी प्रदर्शन में पहुंचे। नेताओं ने कहा कि सरकार तुरंत कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करें, अन्यथा एसकेएस बड़ा आंदोलन करेगा। इस मौके पर सह सचिव सुनीता करेड़ा, रिटायर्ड कर्मचारी नेता रोशन लाल, सुरजीत सिंह, गुरजोत, रानी, रजनी, सुरेशो, सतविंद्र, दीपमाला मौजूद थीं।
यह हैं मांगें
आंगनबाड़ी वर्कर्स व हेल्पर्स को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। कर्मचारी बनाए जाने तक न्यूनतम वेतन 24000 दिया जाए। 2018 में की घोषणाएं लागू कर महंगाई भत्ते की तमाम किस्त मानदेय के साथ दी जाए। िबिना फोन व अन्य संसाधन दिए ऑनलाइन काम का दबाव न दिया जाए। सितंबर 2018 में की वर्कर्स व हेल्पर्स की 1500 एवं 750 रुपये की बढ़ोतरी एरियर सहित दी जाए। आंगनबाड़ी वर्कर्स को पांच लाख व हेल्पर्स को तीन लाख रुपये सेवानिवृत्ति का लाभ दिया जाए। आंगनबाड़ी वर्कर से सुपरवाइजर के रूप में 50 प्रतिशत पदोन्नति तुरंत लागू की जाए। आंगनबाड़ी केंद्रों का बढ़ा किराया ग्रामीण क्षेत्र का 2000, छोटे कस्बे, शहर का 3000 व बड़े शहरों का 5000 रुपये किया जाए। किसी भी विभागीय ट्रेनिंग या बैठक में बुलाने पर टीए व डीए दिया जाए। दुर्घटना पर इलाज का पूरा खर्च व मृत्यु पर अन्य विभागों की तरह तीन लाख रुपये मुआवजा दिया जाए। वर्दी की राशि बढ़ाकर कम से कम 1600 रुपये सालाना की जाए।