संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने केंद्र सरकार के पेश किए गए बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बजट के बहाने संघर्षरत किसानों से बदला लिया गया है। सरकार ने एमएसपी और किसानों की आय दोगुनी करने के नाम पर बजट में एक बार फिर किसानों के साथ बड़ा धोखा किया है। एसकेएम ने किसानों को अपना हक पाने के लिए फिर से संघर्ष के लिए तैयार रहने का आह्वान किया है।
एसकेएम समन्वय समिति के सदस्य डॉ. दर्शन पाल ने कहा कि केंद्र सरकार एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग को रोक रही है, लेकिन किसानों को कम से कम यह उम्मीद थी कि सरकार एमएसपी को लागू करने के लिए पर्याप्त बजट आवंटन करेगी। उन्होंने कहा कि पीएम-आशा एक मजाक बनकर रह गया। पूरे देश में एमएसपी वादे को लागू करने के लिए 2018 में लाई गई योजना में इस वर्ष सिर्फ 1 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। अब जब हम 2022 में हैं, 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का कोई जिक्र नहीं है, सिर्फ खोखले दावे किए हैं।
प्रति माह 21,146 रुपये की लक्षित आय की तुलना में कृषि घरानों की आय बहुत कम है। किसान और किसानी के लिए बेहद चिंता का विषय है कि गेहूं और धान की एमएसपी पर खरीद पिछले साल की तुलना में कम हुई। लाभान्वित किसानों की संख्या में 17 फीसदी की गिरावट और खरीदी गई मात्रा में 7 फीसदी की गिरावट आई।
अन्य फसलों के लिए एमएसपी सुनिश्चित करने और एमएसपी गारंटी पर कोई शब्द ही नहीं है। मगर किसानों को इस बजट से बेहद उम्मीद थी, लेकिन सरकार के वादे खोखले साबित हुए। बजट में किसानों से धोखा दिया। उन्होंने सीधे-सीधे कहा कि यह बजट संघर्षरत किसानों से सरकार का बदला है। ऐसे में किसानों के लिए एमएसपी गारंटी अधिनियम के लिए आंदोलन को तेज करने का आह्वान है।
जगजीत सिंह दल्लेवाल ने कहा कि सरकार ने इस बजट के माध्यम से न्यूनतम समर्थन मूल्य के मुद्दे पर अपने असली इरादों को उजागर किया है। एक तरफ सरकार ने अपने लिखित वादे के 50 दिन बाद भी एमएसपी सुनिश्चित करने के लिए कमेटी का गठन नहीं किया है। जहां किसान सभी फसलों के लिए एमएसपी गारंटी की मांग कर रहे हैं, वहीं बजट भाषण में केवल 1.63 करोड़ किसानों से धान और गेहूं की खरीद का उल्लेख किया गया है, जो देश के सभी किसानों का लगभग 10 फीसदी है। किसान विरोधी बजट को लेकर जल्द कड़ा फैसला लिया जाएगा।