गांव पांची गुजरान रोड स्थित हुडई मेटल्स प्राइवेट फैक्टरी में सुबह तांबा व पीतल पिघलाने काम शुरू हुआ तो अचानक महिलाओं की हालत बिगड़ने लगी। महिलाएं बेसुध होकर गिरने लगी तो अन्य कर्मचारी तुरंत फैक्टरी को खाली कराना शुरू कर दिया। इसके बाद तो अफरा-तफरी मच गई। कुछ देर में ही फैक्टरी से सभी को बाहर निकाल लिया गया था।
शनिवार सुबह फैक्टरी में काम शुरू होने के बाद हाजिरी ले रहीं सुपरवाइजर का दम घुटने लगा तो वह फैक्टरी से बाहर निकल गई। इसके बाद कुछ महिलाएं बेहोश होकर वहीं गिर गईं। यह देखकर फैक्टरी में अफरा-तफरी मच गई। दूसरे श्रमिक भी भागकर बाहर निकलना शुरू हो गए। इसी दौरान बेहोश हुईं महिलाओं को भी फैक्टरी से बाहर निकाला गया और तुरंत आसपास के निजी अस्पतालों में भर्ती करवाया गया। इसके अलावा जो भी महिलाएं गैस के संपर्क में आई थीं, उनकी तबीयत बिगड़ने लगी तो वह भी वाहनों पर सवार होकर अस्पतालों में भर्ती हो गईं। इनमें से कुछ श्रमिक महिलाओं को दवाइयां दीं और जिनकी हालत खराब थी, उनमें 21 महिलाओं का इलाज किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, करीब 35 महिलाओं की तबीयत गैस के संपर्क में आने की वजह से बिगड़ी। इनमें से दो की हालत ज्यादा गंभीर होने के चलते उन्हें खानपुर मेडिकल रेफर कर दिया गया।
इन महिलाओं को अस्पताल में ले जाया गया
अस्पताल में सुमन, किशोरी, शीलो, लोकेश, बबीता, सोनिया, संतोष मनोज, मंजू, रूबी, कमलेश, आस्मीन, सीमा, ममता, उषा, प्रीति, अनिता, नीतू, किरण, सीमा कुमारी, सुरेश, सुनीता, रमेश कुमारी, रीना, मितलेश, किरण, शकुंतला, रजनी, मुकेश, पूनम, रेणु, रेखा, पिंकी को भर्ती कराया गया।
निर्माणाधीन फैक्टरी में किया जा रहा था काम
पांची गुजरान रोड पर स्थित हुडई मेटल्स प्राइवेट लिमिटेड अभी निर्माणाधीन है। करीब एक साल से इसमें काम चल रहा है। ऐसे में निर्माणाधीन फैक्टरी को चलाने की मंजूरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। श्रमिकों से मिली जानकारी के अनुसार फैक्टरी में काम करने के दौरान उन्हें सुरक्षा उपकरण भी उपलब्ध नहीं करवाए जाते हैं। भट्ठी से निकलने वाले धुएं को बाहर निकालने के लिए भी पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं है। भट्ठी चलाने के दौरान प्लांट पर लगी खिड़कियों को खुलवा दिया जाता है।
यह बोलीं महिलाएं
मैं आठ बजे अपनी ड्यूटी पर आ गई थी। बाद में जब सुपरवाइजर सावित्री व संतोष हाजिरी ले रहे थे, उस दौरान उनकी हालत बिगड़ गई। इसके बाद एक-एक करके 8 महिला श्रमिक बेहोश हो गईं, जिनमें से तीन को गन्नौर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दाखिल करवाया, जहां वह अभी उपचारधीन हैं।
- कुसुम, महिला कर्मी
मैं फैक्टरी में काम कर रही थी। इस दौरान अचानक धुआं आने लगा, जिसके बाद काम करने वाली महिला कर्मी बेहोश होने लगी और फैक्टरी में भगदड़ मच गई। किसी तरह बेहोश हुई महिलाओं को गन्नौर के निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया।
- पिंकी, महिला कर्मी
मैं अचानक बेहोश हो गई। जब होश आया तो अस्पताल में थी। होश आने के बाद से सिर में दर्द है और सांस लेने में थोड़ी दिक्कत हो रही है।
- रीना, उपचाराधीन महिला कर्मी
प्रबंधक बोला, रात को किसी ने लगा दी फैक्टरी में आग
रात के समय किसी ने फैक्टरी में आग लगा दी थी, जिसके बाद वहां धुआं फैल गया। इस कारण महिला कर्मियों को थोड़ी दिक्कत हो गई। इनको उपचार के लिए अस्पताल में दाखिल करवाया गया है। सभी महिला कर्मियों की हालत ठीक है।
- मनोज शर्मा, प्रबंधक कंपनी
वर्जन
गैस के संपर्क में आने की वजह से श्रमिकों का दम घुटने लगा था, जिससे कुछ महिलाएं बेहोश हुईं। जितनी महिलाएं उपचाराधीन हैं, उन्हें सिर दर्द, सीने में दर्द व सांस में तकलीफ की समस्या रही। इनमें से चार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में, दो को विद्या देवी अस्पताल में व करीब 30 अन्य को भाटिया अस्पताल में भर्ती किया गया है। इनमें से दो महिलाओं को ज्यादा समस्या थी, जिन्हें उपचार के लिए खानपुर मेडिकल में भर्ती करवाया गया है।
- डॉ. टीना आनंद, एसएमओ गन्नौर