कामी रोड स्थित सहकारी चीनी मिल में रविवार देर शाम निजी कंपनी के कर्मचारियों की अनदेखी से पानी की कमी के कारण बॉयलर की 25 ट्यूब फट गईं, जिससे गन्ना पेराई का कार्य ठप हो गया। ट्यूब फटते ही चीफ इंजीनियर देवेंद्र पहल ने सूझबूझ दिखाते हुए मिल की सभी मशीनरी बंद करवाई। अगर समय पर मशीनें नहीं रुकवाई जाती तो बॉयलर फटने से बड़ा हादसा हो सकता था। पेराई रुकने के बाद किसानों ने सोमवार को मिल में पहुंचकर रोष जताया और प्रबंध निदेशक के कार्यालय के बाहर सड़क पर बैठ गए। प्रबंध निदेशक जितेंद्र जोशी ने किसानों को समझाया और मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया। दोपहर तक जांच के बाद चार कर्मचारियों को काम से हटा दिया गया। प्रबंध निदेशक का कहना है कि पांच दिन के अंदर गन्ना पेराई का कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
सहकारी चीनी मिल में बॉयलर के संचालन व उसकी देखरेख का कार्य मिल प्रबंधन की ओर से निजी कंपनी को दिया गया है। बॉयलर के संचालन के दौरान कम से कम दो कर्मचारियों की ड्यूटी होती है। रविवार देर शाम बॉयलर की ट्यूब में पानी नहीं पहुंचा तो 25 ट्यूब सिकुड़ना शुरू हो गईं। रात को बॉयलर में पानी कम होने के कारण भाप का दबाव अधिक हो गया और कर्मचारी इसका अनुमान नहीं लगा सके। कुछ समय बाद चीफ इंजीनियर निरीक्षण करते हुए बॉयलर की तरफ आए तो देखा कि प्रेशर अधिक हो गया है। उन्होंने तुरंत कर्मियों को ऊपर चढ़ाकर वॉल खोलने के निर्देश दिए। जब तक उसे खोला गया, तब तक 25 ट्यूब फट चुकी थीं। बॉयलर की छत को भी नुकसान पहुंचा है। गनीमत रही कि प्रेशर को जल्द नियंत्रित कर लिया गया। अगर बॉयलर फट जाता तो माल के साथ जान का नुकसान भी हो सकता था।
किसान प्रबंध निदेशक कार्यालय के बाहर सड़क पर बैठे, जांच की मांग
मिल से निकलने के बाद किसान प्रबंध निदेशक कार्यालय के बाहर सड़क पर जा बैठे। 10 मिनट बाद लघु सचिवालय से प्रबंध निदेशक जितेंद्र जोशी किसानों के बीच पहुंचे। किसानों ने आरोप लगाया कि मिल को चलाने के लिए ठेका कंपनी ने अकुशल कर्मचारियों को लगा रखा है। ऐसे में पांच दिन से ठीक ढंग से पेराई नहीं हो सकी। अकुशल कर्मचारियों के कारण रविवार देर शाम बॉयलर की 25 ट्यूब फट गईं। लापरवाही करने वालों पर कार्रवाई की मांग की।
किसानों को दिया अन्य मिलों में गन्ना ले जाने का विकल्प
किसानों को राहत देने के लिए प्रबंध निदेशक ने पानीपत, गोहाना व रोहतक मिल प्रबंधन से बात की। उन्होंने किसानों को विकल्प दिया कि अगर आप चाहें तो अपना गन्ना इन मिलों में ले जा सकते हैं। हालांकि किसानों ने फैसला लिया कि वे अपना गन्ना सोनीपत मिल में ही डालेंगे। तकनीकी खराबी आने से पहले मिल में 15 हजार 775 क्विंटल गन्ने की पेराई की जा चुकी थी। सोमवार दोपहर बाद तीन बजे तक यार्ड में 10 हजार 920 क्विंटल गन्ना बचा हुुआ है। मिल प्रशासन ने तकनीकी खराबी दूर होने तक गन्ने की पर्चियों को जारी करने पर रोक लगा दी है।
निजी कंपनी को दूसरे कर्मचारी लगाने के निर्देश
तकनीकी खराबी को दूर करने के लिए मिल प्रशासन ने पानीपत से बॉयलर इंजीनियर व शुगर फेडरेशन से तकनीकी अधिकारी को बुलाया। प्रबंध निदेशक की अध्यक्षता में जांच की गई। इस दौरान रविवार देर शाम ड्यूटी पर तैनात रहे वाटरमैन, बॉयलर मैन समेत चार कर्मचारियों की गलती सामने आई, जिनको प्रबंध निदेशक ने कंपनी को निर्देश देकर उन्हें हटवा दिया। साथ ही कंपनी को कहा गया कि इस तरह की लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कंपनी को दूसरे कर्मचारी लगाने के निर्देश दिए।
वर्जन
चीनी मिल में बॉयलर की ट्यूब फटने के कारण गन्ना पेराई का कार्य ठप हो गया। तकनीकी खराबी दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। पांच दिन के अंदर गन्ना पेराई का कार्य शुरू करा दिया जाएगा। जांच के बाद चार कर्मचारियों को काम से हटा दिया गया है।
- जितेंद्र जोशी, प्रबंध निदेशक चीनी मिल सोनीपत
चीनी मिल में कार्यालय के बाहर बैठे किसानों को समझाते प्रबंध निदेशक जितेंद्र जोशी। संवाद- फोटो : Sonipat