कोरोना संक्रमण से जंग जीतकर लोग अपने घरों को लौटे तो तो इसके पीछे डॉक्टरों व स्टाफ नर्स की मेहनत, त्याग और जज्बा भी रहा। अस्पतालों में चिकित्सक के साथ नर्सों ने कोरोना संक्रमितों के उपचार में कोई कसर नहीं छोड़ी। परिवार के सदस्यों से अलग रहते हुए नर्सों ने डटकर कोरोना महामारी से मुकाबला किया। सोनीपत के नागरिक अस्पताल में इन्फेक्शन कंट्रोल नर्स (आईसीएन) के पद पर नियुक्त बिमला रानी कोरोना मरीजों के उपचार के दौरान खुद तीन बार संक्रमित हुईं। उसके बाद भी हौसला नहीं टूटा। दूसरी बार संक्रमित होने के बाद वह शुगर (डायबिटीज) से पीड़ित हो गई थी। उसके बावजूद वह लगातार अपना फर्ज निभा रही है। दूसरी बार संक्रमित होने के दौरान उनका बेटा भी उनके संपर्क में आने से संक्रमित हो गया था।
सेक्टर-12 निवासी बिमला रानी नागरिक अस्पताल में इन्फेक्शन कंट्रोल नर्स (आईसीएन) के पद पर तैनात हैं। वह चिकित्सकों से लेकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को संक्रमण से खुद को बचाव के लिए लगातार प्रशिक्षण दे रही हैं। देश में जब लॉकडाउन की शुरुआत हुई थी, उस दौरान वह कोरोना संक्रमित हो गई थीं। इसके बाद मई 2020 में वह दोबारा संक्रमित हुईं। उस दौरान 28 वर्षीय बेटा रजत भी उसके संपर्क में आने के संक्रमित हो गया था। इस दौरान उसने खुद को अपनी बेटी से अलग दूसरे कमरे में आइसोलेट कर दिया। इस दौरान उनको बेटी ने खाना बनाकर दिया। बिमला रानी ने बताया कि दूसरी बार संक्रमण होने के दौरान वह शुगर (डायबिटीज) का शिकार हो गईं। अब वह शुगर पीड़ित होने पर भी वह अपना फर्ज निभा रही हैं। उसने तीन बार कोरोना संक्रमण को मात दी। अब परिवार को संभालने के साथ अस्पताल में मरीजों की सेवा में जुटी हुई हैं।
आईसीएन बिमला रानी ने बताया कि कोरोना को मात देने के लिए उन्होंने फलों का ज्यादा सेवन किया। साथ ही पौष्टिक भोजन करने के साथ सुबह-शाम योग भी किया। वह परिवार के सदस्यों के साथ अस्पताल में कर्मचारियों व साथी नर्सिंग ऑफिसर को कोरोना से बचने के लिए एहतियात बरतने के लिए प्रेरित करती रहीं।