ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम की जीत पर विजयी चिह्न बनाते सुमित के परिजन।
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सोनीपत। भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने जर्मनी हो हराकर 41 साल बाद ओलंपिक में देश को कांस्य पदक दिलाया है। सोनीपत के गांव कुराड़ निवासी हॉकी खिलाड़ी सुमित के घर खुशी का माहौल है। सुमित को बचपन में हॉकी स्टिक व जूतों की चाहत थी। बड़े भाई अमित ने सुमित को खेलने के लिए यही लालच दिया। आठ वर्ष की आयु में सुमित फौरन गांव के एचके वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में स्थापित हॉकी अकादमी में पहुंच गया। हॉकी स्टिक व जूते पाकर ऐसी खुशी मिली कि उन्होंने हॉकी को ही जीवन बना लिया। कड़े संघर्ष के बाद सुमित को सोनीपत का पहला पुरुष ओलंपियन हॉकी खिलाड़ी होने का गौरव भी मिला है।
मजदूर पिता प्रताप सिंह व माता दर्शना देवी ने भी सुमित की खेल के प्रति रुचि देखकर कभी घर के गुजर-बसर में हाथ बंटाने के लिए दबाव नहीं दिया। बड़े भाई जय सिंह और अमित ने खुद मजदूरी कर परिवार की जरूरतों को पूरा किया और सुमित को खेलने के लिए प्रोत्साहित किया। शुरुआती दौर में सुमित अकेले ही घंटों तक मैदान में स्टिक और गेंद के साथ अभ्यास करते रहते थे। गांव में हॉकी कोच नरेश के नेतृत्व में उनका खेल निखरा। स्कूल की ओर से उन्होंने प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू किया। एक बार गुरुग्राम हॉस्टल के लिए ट्रायल निकले तो उनका चयन हो गया। करीब तीन साल तक वे हॉस्टल में रहे। इसके बाद भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के उत्तर क्षेत्रीय केंद्र बहालगढ़ में उनका चयन हुआ।
उसके बाद सुमित का खेल निखरता चला गया। अब हॉकी टीम ने ओलंपिक में देश को 41 साल बाद कांस्य पदक दिलाया है। सुमित के बड़े भाई अमित ने भारतीय पुरुष हॉकी टीम की जीत पर कहा कि उन्हें पहले से ही विश्वास था कि टीम देश को अवश्य ही पदक दिलाएगी। भाई का घर लौटने पर जोरदार स्वागत किया जाएगा। इसके लिए अभी से तैयारी में जुट गए हैं। उन्होंने बताया कि भाई मां का फोटो लगा लॉकेट गले में पहनकर गया था, जिससे उसे सदैव मां का आशीर्वाद मिलता रहा।