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किसान आंदोलन : एक साल से किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हैं महिलाएं

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कुंडली बॉर्डर धरना स्थल पर जाते किसान। संवाद - फोटो : Sonipat
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विष्णु कुमार
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सोनीपत। कुंडली बॉर्डर पर मांगों को लेकर एक साल से संघर्षरत किसानों की जीत में नारी शक्ति का भी बड़ा योगदान रहा है। इस आंदोलन के दौरान महिलाएं किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहीं। किसान आंदोलन को एक साल पूरा होने पर कुंडली बॉर्डर पर डटी महिलाओं से बातचीत की गई। महिलाओं ने इसे अधूरी जीत बताया। नारी शक्ति ने कहा कि सरकार ने तीनों कृषि कानून वापस लेने का तो एलान कर दिया, लेकिन जब तक एमएसपी की मांग को पूरा नहीं करती, तब तक वे यहीं डटी रहेंगी। मांगें पूरी होने पर ही वे जीत का पूरा जश्न मनाएंगी। संवाद
यह बोलीं महिलाएं
अभी कृषि कानून वापस लेने की घोषणा हुई है, एमएसपी की गारंटी नहीं मिली। हमारी जो मांगें हैं, वो पूरी करवाने के बाद ही बॉर्डर से जाएंगे। अभी हमारी अधूरी जीत हुई है, जिसकी हम खुशी मना नहीं सकते। हम उस वक्त खुशी मनाएंगे, जब हमें एमएसपी की गारंटी मिल जाएगी और हमारे किसानों के ऊपर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएंगे।
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- रेणु कादयान, बेरी ब्लॉक प्रवक्ता, भारतीय किसान यूनियन (चढूनी)
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सरकार जागी है, वो अपने फायदे के लिए जागी है। ये हमारी अधूरी जीत है। शुरू से हमारी चार मांगें रही हैं। अभी कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पूरी हुई है। तीन मांगें शेष हैं। जब तक हमारी सभी मांगें पूरी नहीं हो जातीं और किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस नहीं होते, शहीद किसानों को उनकी शहादत का मान नहीं मिलता, तब तक हम यहां से नहीं जाएंगे। कल एसकेएम की बैठक होनी है, जैसे आदेश मिलेंगे, उसी के अनुसार काम करेंगे।
- बिंदु चौहान, प्रदेश उपाध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन (चढूनी)
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आंदोलन में जिन किसानों ने शहादत दी है, यह उन सबकी जीत है। एक साल से किसान अपनी मांगों के लिए अपने घर से दूर बॉर्डर पर हर प्रकार की परेशानी झेलते हुए यहां डटे रहे। यह किसानों की एकता की जीत है। इस जीत पर मैं सभी को बधाई देती हूं, साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी धन्यवाद करती हूं।
- कुलदीप कौर, पटियाला
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यह जीत किसानों की एकता की जीत है। हरियाणा व पंजाब के हमारे भाई लंबे समय से एकजुट होकर अपनी मांगों के लिए संघर्षरत रहे। अनेक किसानों ने अपनी शहादत दी। यह जीत उसी का परिणाम है। किसानों के संघर्ष को मिली जीत की खुशी में ही आज हम यहां लड्डू बांट रहे हैं।
- सुमन, पानीपत
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केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए तीनों कृषि कानूनों के विरोध में किसान एक साल से संघर्ष कर रहे हैं। इस संघर्ष में अनेक किसानों को अपनी जान गंवानी पड़ी, लेकिन सरकार ने कभी किसानों की मौत पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। किसानों की एकजुटता को देखते हुए ही सरकार को कृषि कानून वापस लेने पड़े। यह किसानों की एकता की जीत है।
- बलविंद्र कौर, पंजाब
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आज हमें मांगें पूरी होने की खुशी है, वहीं किसान आंदोलन में अपनी जान गंवाने वाले किसानों की शहादत का गम भी है। किसानों की शहादत और हरियाणा-पंजाब के किसानों की एकजुटता के चलते ही हमें यह जीत मिली है। अब सरकार एमएसपी की गारंटी भी दे दे तो किसान यहां से अपने घर लौट जाएंगे।
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- कुलदीप कौर, नवां शहर, पंजाब
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काले कानून तो रद्द हो चुके हैं। जब तक एमएसपी की गारंटी नहीं मिल जाती, तब तक हम यहां से जाने वाले नहीं हैं। मांगों के लिए बॉर्डर पर एक साल से बैठे हुए हैं। एमएसपी के लिए आगे भी जितने समय तक बैठना पड़े, बैठेंगे। अपनी मांगें पूरी करवाने के बाद ही यहां से वापसी करेंगे, उससे पहले नहीं।
- दलजींद्र कौर, लुधियाना
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