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किसान आंदोलन : हर घंटे कुंडली बॉर्डर पर पहुंच रहीं 15 ट्रैक्टर-ट्रॉलियां, बढ़ी किसानों की भीड़

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कुंडली बॉर्डर पर लंगर की तैयारी करतीं महिलाएं। संवाद - फोटो : Sonipat
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संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के आह्वान पर जारी ऐतिहासिक किसान आंदोलन का शुक्रवार को एक साल पूरा हो रहा है। आंदोलन के एक साल पूरा होने व पीएम की तरफ से तीनों कानूनों की वापसी की घोषणा के बाद एसकेएम ने किसानों से दिल्ली बॉर्डर्स पर पहुंचने और आंशिक जीत उत्सव मनाने का आह्वान किया था। इस अपील का वीरवार को अच्छा खासा असर देखने को मिला। आलम यह था कि कुंडली-सिंघु बॉर्डर पर किसानों के पहुंचने का सिलसिला सुबह से शुरू होकर देर रात तक जारी रहा। हर एक घंटे में 15 ट्रैक्टर-ट्रॉलियां कुंडली बॉर्डर पर पहुंच रहे हैं। कानून वापस लिए जाने की घोषणा से किसान जोश में हैं, लेकिन एमएसपी समेत लंबित मांगों को भी नहीं भूले हैं। उनकी सरकार से उम्मीद भरी अपील है कि बाकी मांगों को जल्द ही पूरा किया जाए, ताकि वह घर लौट सकें।
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संयुक्त किसान मोर्चा समन्वय समिति के सदस्य डॉ. दर्शन पाल ने वीरवार को कहा कि तीनों कृषि कानूनों के विरोध में 26 नवंबर 2020 को ‘दिल्ली चलो’ के आह्वान के साथ शुरू हुआ किसान आंदोलन शुक्रवार को अपने ऐतिहासिक संघर्ष का एक साल पूरा करेगा। केंद्र सरकार की असंवेदनशीलता और अहंकार के चलते मेहनतकश किसान-मजदूर वर्ग को ऐतिहासिक आंदोलन करना पड़ा। यह दुनिया के इतिहास में सबसे बड़े और लंबे आंदोलन में से एक होगा। इस आंदोलन में एक साल के दौरान देश के कोने-कोने से करोड़ों लोगों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि किसान विरोधी कानूनों को निरस्त करने के सरकार के निर्णय और कैबिनेट की मंजूरी के अलावा किसान आंदोलन ने किसानों, आम नागरिकों और देश के लिए कई तरह की जीत हासिल की है। आंदोलन ने क्षेत्रीय, धार्मिक या जातिगत विभाजनों को खत्म करते हुए किसानों के लिए एकीकृत पहचान की भावना भी पैदा की।
देशभर के लोगों के सहयोग से तीनों कृषि कानूनों को वापस करना संभव हो पाया
डॉ. दर्शन पाल ने कहा कि आंदोलन ने ट्रेड यूनियनों, महिलाओं, छात्रों और युवा संगठनों सहित अन्य प्रगतिशील और लोकतांत्रिक जन संगठनों के सहयोग से ताकत हासिल की। भारत के लगभग सभी विपक्षी राजनीतिक दल सालभर के संघर्ष में किसानों के समर्थन में खड़े हुए। इस जन आंदोलन में कलाकारों, शिक्षाविदों, लेखकों, डॉक्टरों, वकीलों आदि सहित समाज के कई वर्गों ने अपना योगदान दिया। एसकेएम इस आंदोलन के सभी प्रतिभागियों और समर्थकों के प्रति अपना आभार व्यक्त करता है और एक बार फिर दोहराता है कि तीनों किसान विरोधी कानूनों को निरस्त करना आंदोलन की सिर्फ पहली बड़ी जीत है। एसकेएम प्रदर्शनकारी किसानों की बाकी जायज मांगों को पूरा किए जाने का इंतजार कर रहा है।
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मोर्चों पर किसान जुटे, बड़े पैमाने पर होगा विरोध प्रदर्शन
एसकेएम के आह्वान पर दिल्ली मोर्चा और कई राज्यों की राजधानियों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन के साथ आंदोलन के एक वर्ष को यादगार बनाने के लिए किसान काफी संख्या में एकजुट हो रहे हैं। दिल्ली के विभिन्न मोर्चों पर हजारों की संख्या में किसान पहुंच रहे हैं। दिल्ली से दूर राज्यों में इस आयोजन को रैलियों, धरने और अन्य कार्यक्रमों के साथ यादगार बनाया जाएगा। कर्नाटक में किसान प्रमुख हाईवे को जाम करेंगे। तमिलनाडु, बिहार और मध्यप्रदेश में ट्रेड यूनियनों के साथ संयुक्त रूप से सभी जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। रायपुर और रांची में ट्रैक्टर रैलियां होंगी। पश्चिम बंगाल में कल कोलकाता और अन्य जिलों में रैली की योजना है।
सोशल मीडिया के जरिये मांगा सहयोग, बब्बू मान व सिप्पी गिल भी पहुंचेंगे
आज होने वाले कार्यक्रम में कुंडली-सिंघु बॉर्डर पर पंजाबी कलाकार बब्बू मान, सिप्पी गिल समेत कई बड़ी हस्तियां पहुंचेंगी और किसानों में गानों से जोश भरेंगी। किसान सोशल मीडिया पर लगातार देशवासियों व अन्य संगठनों से सहयोग मांग रहा है। आह्वान किया गया है किसानों के अलावा कर्मचारी, मजदूर, चिकित्सक, लेखक, बुद्धिजीवी वर्ग के प्रतिनिधि भी किसान आंदोलन को समर्थन देने के लिए धरनास्थलों पर पहुंचें।
सुबह से पंजाब की तरफ से आ रहीं ट्रैक्टर-ट्रॉलियां, बढ़ी चहल-पहल
कुंडली धरनास्थल पर सुबह से पंजाब हरियाणा के अन्य क्षेत्रों से किसान पहुंच रहे हैं। हर घंटे करीब 15 ट्रैक्टर-ट्रॉलियां व अन्य वाहन कुंडली की तरफ आ रहे हैं। बॉर्डर पर भीड़ बढ़ने के बाद फिर से चहल-पहल बढ़ गई है। पहले की तरफ महिलाएं किसानों के लिए लंगर की तैयारी करती दिखाई दे रही हैं। महिलाओं की संख्या में भी इजाफा हो गया है।
यह बोले किसान...
अब संसद कूच पर दोबारा विचार करना चाहिए
किसान अपने घर से तीनों कानूनों की वापसी व एमसपी की गारंटी कानून बनवाने की मांग को पूरा कराने की मांग के लिए चले थे। पीएम ने तीनों कानून रद्द कर मुख्य मांग को पूरा कर दिया है। अब सरकार एमएसपी की मांग को भी जल्द पूरा कर दें। साथ ही केंद्र सरकार को चाहिए कि वह कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों की मदद करने वाले एनआरआई को वीजा देने में आनाकानी न करें। अब सरकार ने कानून वापस लेकर उनकी मांगों का समर्थन ही किया है। साथ ही मेरा निजी मत है कि अब संसद कूच पर दोबारा विचार करना चाहिए। हालांकि इसका फैसला एसकेएम को लेना है।
- बूटा सिंह, किसान नेता शादीपुर, पंजाब
यह किसानों की जीत
पीएम ने तीनों कृषि कानून वापस लेने की घोषणा कर दी है। यह किसानों की जीत है। हालांकि अभी पूरी तरह जश्न मनाने का समय नहीं है। ऐसे में किसान आंदोलन का एक साल पूरा होने पर आंशिक उत्सव मना रहे हैं। कुंडली समेत अन्य बॉर्डर पर किसान पहले की तरह पहुंच रहे हैं।
- बलविंदर सिंह, मलकापुर, पंजाब
सभी मुकदमे भी तुरंत प्रभाव से वापस होने चाहिए
आंदोलन के दौरान किसानों पर मुकदमे दर्ज कर सरकार ने उनका मनोबल तोड़ने का प्रयास किया था, लेकिन किसान अडिग रहे। तीनों कानून वापसी की घोषणा हो चुकी है। ऐसे में सभी मुकदमे भी तुरंत प्रभाव से वापस होने चाहिए।
- संदीप, फतेहपुर, पंजाब
एमएसपी की गारंटी कानून हमारी मुख्य मांग
सरकार ने अभी किसानों की सभी मांगें नहीं मानी हैं। एमएसपी की गारंटी कानून हमारी मुख्य मांग है। साथ ही 700 से अधिक किसानों ने यहां शहादत दी है। उनके परिजनों को भी आर्थिक मदद मिलनी चाहिए। ऐसे में सरकार को उनके लिए कदम उठाने चाहिए। साथ ही सभी मांगों को पूरा कर देना चाहिए। एसकेएम के एक आह्वान पर यहां फिर से किसानों की सैकड़ों ट्रॉलियां व ट्रैक्टर पहुंच गए हैं। सरकार उनकी मांग मानकर उन्हें बेहतर तोहफा दें, जिससे वह हंसी-खुशी लौट सकें और आंशिक की बजाय जमकर जश्न मना सकें।
- बाबा गुरपाल सिंह, कुरुक्षेत्र

कुंडली बॉर्डर पर ट्रैक्टर-ट्रालियां लेकर पहुंचे किसान। संवाद- फोटो : Sonipat

कुंडली बॉर्डर पर पहुंचकर सरकार से अन्य मांगों को जल्द पूरा करने की मांग करते किसान। संवाद- फोटो : Sonipat

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