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दिवाली : शाम 6:10 से 8:06 बजे तक लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त

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छोटी दिवाली पर परिवार के साथ पूजन करते समाजसेवा समिति के प्रधान अनिल गुप्ता सीटू। संवाद - फोटो : Sonipat
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हिंदू धर्म का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार दीपावली हर वर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाया जाता है। इस वर्ष यह त्योहार वीरवार को मनाया जाएगा। जिसको लेकर जिलावासियों में उत्साह बना हुआ है। हालांकि बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए इस बार आतिशबाजी पर प्रतिबंध लगाया गया गया है। इसके बावजूद त्योहार का उत्साह चरम पर है। बुधवार को लोगों ने घरों में छोटी दिवाली मनाई। इस दौरान दीप जलाए और विधि-विधान से पूजा अर्चना की।
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चिटाने वाली माता मंदिर के पुजारी पंडित अमित शौनक ने बताया कि अमावस्या तिथि वीरवार प्रात: 6:03 बजे से आरंभ होकर अगले दिन शुक्रवार को तड़के 2:44 बजे तक रहेगी। घरों में लक्ष्मी पूजन का समय शाम 6:10 से रात 8:06 बजे तक रहेगा। पंडित अमित शौनक ने बताया कि शुभ मुहूर्त में अगर घर पर लक्ष्मी पूजन विधि-विधान से किया जाए तो माता लक्ष्मी का आगमन व स्थायित्व दोनों ही प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि कार्यालयों व कारखानों में लक्ष्मी पूजन का समय दोपहर बाद 3:09 से शाम 4:35 बजे तक रहेगा। इस समय पूजन करने से रोजगार चलता रहेगा।
नई तस्वीर या प्रतिमा की करें स्थापना
पंडित अमित शौनक ने बताया कि दीवाली पर्व पर नई प्रतिमा या तस्वीर की स्थापना करनी चाहिए। ऐसा चित्र या प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए, जिसमें माता लक्ष्मी विराजमान हो और साथ में श्री गणेश व माता सरस्वती भी विराजमान अवस्था में हों, ताकि धन, ज्ञान व शुभता की प्राप्ति, स्थायित्व के साथ इनका सुख भी प्राप्त हो। उन्होंने बताया कि इस दिन माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए कई प्रकार के पदार्थों का भोग लगाया जाता है। माता को भोग में गुड़, चना, गन्ना, केला, श्रीफल अर्थात पेठा, अनार, सिंघाड़ा, हलवा, खीर, चावल, दूध, जलेबी सहित विभिन्न प्रकार की मिठाइयां व मेवे प्रसाद स्वरूप अर्पण किए जाते हैं।
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प्रदोष काल में महालक्ष्मी पूजन का महत्व
पंडित अमित शौनक ने बताया कि कार्तिक अमावस्या तिथि पर महालक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व होता है। दिवाली पर अमावस्या के दिन प्रदोष काल होने पर लक्ष्मी पूजन का विधान होता है। प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्त को कहा जाता है। यह समय लक्ष्मी पूजन के लिए सबसे उत्तम माना गया है। इसके अलावा प्रदोष काल के दौरान स्थित लग्न में पूजन करना सर्वोत्तम माना गया है। इस दौरान जब वृषभ, सिंह, वृश्चिक व कुंभ राशि लग्न में उदित हो, तब माता लक्ष्मी का पूजन किया जाना चाहिए।
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लक्ष्मी-गणेश पूजन का शुभ मुहूर्त
लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त : शाम 6:10 से रात 8:06 बजे तक
लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल मुहूर्त : सुबह 5:35 से रात 8:10 बजे तक
लक्ष्मी पूजन निशिता काल मुहूर्त : सुबह 11:38 से 12:30 बजे तक
लक्ष्मी पूजन के लिए शुभ चौघड़िया
प्रात: मुहूर्त (शुभ) : सुबह 6:35 से सुबह 7:58 बजे तक
प्रात: मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत) : सुबह 10:42 से दोपहर बाद 2:49 बजे तक
अपराह्न मुहूर्त (शुभ) : शाम 4:11 से 5:34 बजे तक
शाम का मुहूर्त (अमृत, चर) : शाम 5:34 से रात 8:49 बजे तक
रात्रि मुहूर्त (लाभ) : रात 12:05 से तड़के 1:43 बजे तक

छोटी दिवाली पर घर के दरवाजे पर दीया जलाती महिला। संवाद- फोटो : Sonipat

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