सिरसा के नौ साल पुराने धोखाधड़ी के मामले में आरोपी को अगवा कर नौ करोड़ के बिटक्वाइन जबरन ट्रांसफर कराने के आरोपी सोनीपत के दोनों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। एसपी ने विभागीय जांच शुरू कराकर एएसपी को जांच अधिकारी बनाया है। आरोपियों में एक एएसपी खरखौदा का तत्कालीन रीडर और दूसरा गोहाना थाने का मुंशी है।
जयपुर के जगतपुरा क्षेत्र की ओबीसी कॉलोनी का रहने वाला शशिकांत शर्मा कई मामलों में नामजद है। उस पर ठगी के करीब 10 मामले दर्ज हैं। सिरसा जिले में वह नौ लाख की ठगी के मामले में वर्ष 2013 से वांछित था। सिरसा सिटी थाना पुलिस ने उसको अपने यहां से गिरफ्तार दिखाया था। सिरसा पुलिस अधिकारियों को शशिकांत ने बताया कि उसको सोनीपत पुलिस के पुलिसकर्मियों ने जयपुर से अगवा किया है।
अगवा करते समय उसका दोस्त गौरव भी फ्लैट पर था। उसने सोनीपत पुलिस के एएसआई शिवकुमार और उसके साथी पुलिसकर्मी मोनू को पहचानने का दावा किया था। उसने बताया कि पुलिसकर्मियों से उसका कई साल से परिचय था। पुलिसकर्मियों ने उससे मारपीट की और जबरन उसके मोबाइल से 30 बिटक्वाइन अपने एक परिचित के खाते में ट्रांसफर कर लिए। उनकी कीमत करीब नौ करोड़ रुपये है। इस पर सिरसा में जीरो एफआईआर दर्ज की गई थी।
एएसआई शिवकुमार की पहचान एएसपी खरखौदा के तत्कालीन रीडर के रूप में हुई। उसको सस्पेंड कर दिया गया। वहीं मोनू की पहचान हेड कांस्टेबल पवन कुमार के रूप में हुई। वह गोहाना थाने में तैनात था। उसको भी सस्पेंड कर दिया गया है। वहीं इनके साथी तीन अन्य की पहचान का प्रयास किया जा रहा है।
दोनों आरोपी पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। इनकी विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। मामले में गहनता से जांच की जाएगी। - उपासना, एएसपी, मुख्यालय