हरियाणा के सोनीपत जिले के गन्नौर में जीटी रोड स्थित सीसीएएस जैन कन्या महाविद्यालय में एक चौंका देने वाला मामला सामने आया है। जहां महाविद्यालय प्रबंधन ने स्नातकोत्तर प्रथम वर्ष की छात्राओं से फीस तो ले ली, लेकिन विश्वविद्यालय में जमा नहीं करवाई। इस पर महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक ने छात्राओं को रोल नंबर जारी नहीं किए। महाविद्यालय में मामले को दबाने के लिए छात्राओं को फर्जी रोल नंबर जारी कर दो पेपर भी करवा दिए।
मामले का खुलासा तब हुआ, जब तीसरे पेपर में प्रश्नपत्र ही नहीं और महाविद्यालय प्रबंधन ने छात्राओं का रोल नंबर ही वापस ले लिया। महाविद्यालय की तरफ से बताया गया कि उनका रजिस्ट्रेशन नहीं होने से वे परीक्षा नहीं दे पाएंगी। फिलहाल पूरे मामले में महाविद्यालय प्रबंधन इसका जिम्मेदार महाविद्यालय के क्लर्क को ठहरा रहा है।
इस मामले में प्रबंधन ने क्लर्क के खिलाफ एक दिन पहले मुकदमा भी दर्ज कराया था। सीसीएएस जैन कन्या महाविद्यालय में स्नातकोत्तर प्रथम वर्ष में सात छात्राएं शिक्षा ग्रहण करती हैं। छात्राओं का कहना है कि उन्होंने रजिस्ट्रेशन करवाने के साथ ही महाविद्यालय में हर माह फीस भी जमा करवाई थी।
उसके बावजूद उनका रजिस्ट्रेशन नहीं करवाया गया, जिससे उन्हें अब परीक्षा से वंचित रहना पड़ रहा है। महाविद्यालय प्रबंधन का कहना है कि क्लर्क संदीप त्यागी ने यह सब फर्जीवाड़ा किया है, जिसके बाद से ही वह महाविद्यालय नहीं आ रहा है।
महाविद्यालय प्रधान ने क्लर्क के खिलाफ थाना बड़ी में शिकायत देकर मुकदमा दर्ज करवाया है। महाविद्यालय प्रबंधन का कहना है कि छात्राओं का साल खराब न हो, इसके लिए उच्चाधिकारियों से बात की जा रही है।
सात छात्राओं के भविष्य अधर में
फीस जमा करवाने के बाद भी परीक्षा से वंचित छात्राओं का भविष्य अधर में लटक गया है। एमए प्रथम वर्ष की छात्रा पूजा, रजनी, निधि, प्रियंका, प्रतिभा, किरण व एक अन्य छात्रा ने बताया कि उन्होंने पूरी मेहनत के साथ परीक्षा की तैयारी की थी। अब उनके साथ महाविद्यालय प्रबंधन द्वारा ही इस तरह का फर्जीवाड़ा किया गया है। छात्राओं ने एमडीयू प्रबंधन से मांग की है कि उन्हें परीक्षा का मौका दिया जाए, ताकि उनका साल खराब होने से बच सके।
परीक्षा से एक दिन पहले जारी किए गए फर्जी रोल नंबर
छात्राओं ने बताया कि उनकी परीक्षा 4 मार्च से शुरू हुई थी। उन्हें तीन मार्च को महाविद्यालय बुलाकर रोल नंबर दिए गए। यही नहीं महाविद्यालय प्रबंधन ने उन्हें परीक्षा के एक दिन पहले ही बताया कि उनका पाठ्यक्रम बदल गया है, उन्हें परीक्षा नए पाठ्यक्रम के आधार पर ही देनी होगी। उन्हें हैरानी तो हुई, लेकिन जैसे-तैसे कर रातभर परीक्षा की तैयारी की। 4 व 7 मार्च को उनके दो पेपर हुए।
तीसरा पेपर 14 मार्च को था, लेकिन प्रश्नपत्र सही समय पर नहीं आया। महाविद्यालय ने इस बारे में विश्वविद्यालय के पास ई-मेल भेजी तो विवि की तरफ से उन्हें बताया गया कि सातों छात्राओं का रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है। विवि की तरफ से उनका रोल नंबर भी नहीं भेजा गया, जिसके बाद फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। आरोप है कि मामले का खुलासा होने पर क्लर्क महाविद्यालय के रिकॉर्ड सहित फरार हो गया है।
स्नातकोत्तर की छात्राओं की फीस विश्वविद्यालय में जमा करवाने के बारे में क्लर्क से पूछा गया था। उसने कहा कि फीस जमा करवा दी है। मेरे पास इसका कोई रिकॉर्ड नहीं होता, क्योंकि यह प्रधान के मोबाइल से ऑनलाइन होता है। 4 मार्च को एमए अंग्रेजी का पेपर न आने पर विवि प्रबंधन से बात की तो उन्होंने रोल नंबर व मेल डालने की बात कही। मेल भेजने के बाद प्रश्नपत्र आ गया था। 7 मार्च को एक मेल आई कि विवि की फीस जमा नहीं की गई है। उसी दिन क्लर्क संदीप मेरे मोबाइल पर इस्तीफा भेजकर चला गया था। छात्राओं द्वारा फीस जमा करवाने के बावजूद उसे विवि में जमा नहीं करवाई गई। मामले को दबाने के लिए उसने छात्राओं को फर्जी रोल नंबर भी जारी किए। अब प्रश्नपत्र नहीं आए तो मामला उजागर हुआ। - एसके मल्होत्रा, प्राचार्य, सीसीएएस जैन कन्या महाविद्यालय, गन्नौर
महाविद्यालय में हुए फर्जीवाड़े का मामला मेरे संज्ञान में नहीं था। मैं चार मार्च को महाविद्यालय में आया था। बाद में प्राचार्य ने फोन पर सूचना दी, जिसके बाद आरोपी क्लर्क के खिलाफ पुलिस में शिकायत की गई है। क्लर्क महाविद्यालय भी नहीं आ रहा है। विद्यार्थियों का भविष्य खराब न हो इसके लिए उच्चतर शिक्षा विभाग व विश्वविद्यालय के अधिकारियों से संपर्क किया जा रहा है। हमारा प्रयास है छात्राओं को मर्सी चांस ( एक और मौका) दिलवाया जाए। - आनंद जैन, प्रधान, सीसीएएस जैन कन्या महाविद्यालय, गन्नौर