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27 करोड़ के स्टेडियम पर विवाद, खेल विभाग के अधीन देने को एचएसवीपी ने लिखी चिट्ठी, 70 लाख का खर्च देखकर लेने से इंकार

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स्टेडियम में एथलेटिक्स ट्रैक के पास उगी झाडिय़ां - फोटो : Sonipat
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सोनीपत। खिलाड़ियों को बेहतर खेल सुविधाएं देने के लिए 27 करोड़ रुपये खर्च करके छह साल पहले सेक्टर-4 में खेल स्टेडियम जरूर बना दिया। लेकिन उस स्टेडियम को लेकर खेल विभाग व एचएसवीपी के बीच विवाद शुरू हो गया है। जहां उस स्टेडियम पर हर साल बिजली बिल समेत देखरेख पर लगभग 70 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं और एचएसवीपी के पास पूरा बजट नहीं होने के कारण स्टेडियम की हालत खराब होती जा रही है। इसलिए उसको खेल विभाग के अधीन देने के लिए एचएसवीपी ने चिट्ठी लिखी तो खेल विभाग ने उसका खर्च देखते हुए अपने अधीन लेने से इंकार कर दिया। जिससे यह स्टेडियम अब एचएसवीपी व खेल विभाग के इस विवाद में फंस गया है और वहां झाड़ खड़े रहने लगे हैं तो चेंजिंग रूम के ताले तक नहीं खोले जा रहे हैं। अब मामला खिंचता देखकर एचएसवीपी ने खेल विभाग के मुख्यालय को पत्र लिखकर स्टेडियम उनके अधीन देने के लिए कहा है।
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सेक्टर 4 में एचएसवीपी ने 30 एकड़ जमीन में लगभग 27 करोड़ रुपये की लागत से खेल स्टेडियम बनाया था। जिससे खिलाड़ियों को उस स्टेडियम में बेहतर सुविधाएं मिल सकें और वह रोजाना वहां प्रैक्टिस कर सकें। क्योंकि जिस तरह का बेहतर सुविधाओं वाला वह स्टेडियम बनाया गया था, ऐसा कोई स्टेडियम यहां अभी तक नहीं है। वहां एस्ट्रोटर्फ हॉकी ग्राउंड बनाया गया तो एथलेटिक्स का सिंथेटिक ट्रैक बनाया गया है। इसके अलावा वहां रात को मैच कराने के लिए हाईमास्क लाइट लगवाई गई हैं और खिलाड़ियों को किट पहनने में किसी तरह की परेशानी नहीं हो, उसके लिए अलग-अलग चेंजिंग रूम बनवाए गए हैं। वहां खिलाड़ियों के व्यायाम करने के लिए दौड़ने के लिए अलग से जगह तैयार की गई है। इस तरह उस स्टेडियम में सभी बेहतर सुविधाएं दी गई थीं।
70 लाख सालाना खर्च पर शुरू हुआ विवाद, स्टेडियम की हालत बिगड़ी
एचएसवीपी ने छह साल पहले स्टेडियम को बना दिया और वहां हॉकी की प्रतियोगिता साल में एक या दो बार कराई जाने लगी। इसके अलावा बाहरी युवा वहां एथलेटिक्स के ट्रैक पर प्रैक्टिस करने जाने लगे। उस स्टेडियम की शुरूआत में काफी अच्छी हालत थी और उसकी देखरेख एचएसवीपी कर रहा था। लेकिन उस खेल स्टेडियम का बिजली बिल हर माह लगभग 2 लाख रुपये आ रहा है जो 24 लाख रुपये सालाना है। इसके अलावा स्टेडियम की मेंटीनेंस, सुरक्षा व्यवस्था आदि पर लगाकर साल में लगभग 70 लाख रुपये एचएसवीपी के खर्च हो रहे हैं। जबकि एचएसवीपी को उस स्टेडियम से कोई आमदनी नहीं है। इस कारण ही एचएसवीपी ने वह स्टेडियम खेल विभाग के अधीन देने के लिए पत्र लिखा, जिससे वहां खेल विभाग अपने खिलाड़ियों की प्रैक्टिस करा सके और वहां प्रतियोगिताएं कराई जा सकें। लेकिन खेल विभाग के अधिकारियों ने खेल स्टेडियम अपने अधीन लेने से इंकार कर दिया। जिससे एचएसवीपी भी अब देखरेख पर ध्यान नहीं दे रहा है और वहां झाड़ियां खड़ी हो गई हैं तो चेंजिंग रूम तक के ताले नहीं खोले जाते हैं। वहां सामान भी टूटने लगा है और अब व्यवस्था बिगड़ने लगी है। जिसके बाद एचएसवीपी ने खेल विभाग के मुख्यालय को स्टेडियम अपने अधीन लेने के लिए पत्र लिखा है, जिससे वहां खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मिल सके।
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एचएसवीपी ने खेल स्टेडियम हमें देने के लिए पत्र लिखा था। लेकिन उसपर हम कोई फैसला नहीं कर सकते हैं और उसपर किसी भी तरह का फैसला उच्च अधिकारी करेंगे। इसलिए हमारी ओर से कोई फैसला नहीं लिया गया है और इसपर अभी विचार चल रहा है। जिस तरह के निर्देश मुख्यालय से मिलेंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-निर्मला गुलिया, जिला खेल अधिकारी
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एचएसवीपी का काम कोई भी भवन व स्टेडियम बनाकर देना होता है। इस तरह ही खेल स्टेडियम बनाकर पूरा कर दिया है, लेकिन खेल विभाग उसे अपने अधीन लेने को तैयार नहीं है। खेल स्टेडियम पर एचएसवीपी को हर साल 70 लाख रुपये खर्च करने पड़ रहे है, जिनमें से लगभग 24 लाख रुपये केवल बिजली का बिल रहता है। इस तरह एचएसवीपी हर साल बिना कारण के इतना बजट खर्च नहीं कर सकता है। इसलिए स्टेडियम को खेल विभाग को देने के लिए मुख्यालय स्तर पर मामला पहुंच गया है और इसका जल्द ही कोई समाधान निकाला जाएगा। राजकुमार, एक्सईएन एचएसवीपी

खेल स्टेडियम में बैठने के लिए लगाई गई बैंच के ऊपर से टूटा पड़ा शेड- फोटो : Sonipat

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