किसान आंदोलन को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक खत्म हो गई है। केंद्र सरकार ने किसानों के पास प्रस्ताव भेजा है। किसानों को मुआवजा देने, एमएसपी पर कमेटी में संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्यों को शामिल करने व किसानों पर दर्ज सभी केस वापस लेने का प्रस्ताव भेजा है। इस प्रस्ताव को संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में रखा गया। बैठक में सरकार के प्रस्ताव पर जिन प्वाइंट्स पर संदेह था उन्हें सरकार को भेजा जाएगा। कल दो बजे फिर से किसानों की मीटिंग होगी। किसानों ने कहा कि सरकार से उम्मीद है कि सरकार यहां तक आई तो और आगे भी जाएगी। कल की बैठक में भेजे गए सुझावों पर सरकार के जवाब के बाद किसान अंतिम निर्णय लेंगे। आज की बैठक स्थगीत हो गई है।
चढूनी ने कहा कि 700 से ज्यादा किसानों ने जान गंवाई है। इसको लेकर पंजाब सरकार ने पांच लाख रुपये मुआवजा व एक सरकारी नौकरी की बात की है। केंद्र सरकार को भी यहीं मॉडल अपनाना चाहिए। गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि सभी मांगी मानीजाएंगी तो ही आंदोलन वापस होगा। गुरनाम चढूनी ने स्पष्ट किया कि मोर्चा ने आंदोलन वापस लेने संबंधी कोई घोषणा नहीं की है।
राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार ने जो प्रस्ताव भेजा वो स्पष्ट नहीं है। हमें कुछ आशंकाएं हैं जिन पर कल दोपहर दो बजे चर्चा होगी। हमारा आंदोलन कहीं नहीं जा रहा है, यहीं रहेगा।
केंद्र सरकार ने किसानों को भेजे प्रस्ताव के पहले प्वाइंट में लिखा है कि एमएसपी पर प्रधानमंत्री और कृषि मंत्री कमेटी बनाने की बात कह चुके हैं। इस कमेटी में केंद्र सरकार, राज्य सकरार और किसान संगठनों के प्रतिनिधि और कृषि वैज्ञानिक शामिल होंगे। इस कमेटी में एसकेएम के प्रतिनिधि भी शामिल रहेंगे।
केस वापसी के मामले में सरकार ने कहा कि यूपी और हरियाणा सरकार ने केस वापसी पर सहमति दी है। आंदोलन वापस होने के बाद केस वापस हो जाएंगे। किसान आंदोलन के दौरान भारत सरकार से संबंधित और संघ प्रदेश से संबंधित केस भी आंदोलन वापसी के बाद वापस ले लिए जाएंगे।
मुआवजे की मांग पर केंद्र ने कहा कि हरियाणा और यूपी सरकार मुआवजा देने पर सहमति दे दी है। पंजाब सरकार पहले ही केस वापसी और मुआवजे की घोषणा कर चुकी है। पराली बिल पर सरकार का कहना है कि सरकार ने पराली जलाने को अपराध की श्रेणी से पहले ही हटा दिया है। वहीं बिजली बिल को संसद में पेश करने से पहले स्टेकहोल्डर्स से सुझाव लिए जाएंगे।
समिति के सदस्य युद्धवीर सिंह, गुरनाम सिंह चढूनी, शिवकुमार कक्का और अशोक धवले ने सोमवार को सरकार पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा था कि दो दिन सरकार के निमंत्रण का इंतजार किया है, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। उन्होंने अब आगे की रणनीति के लिए मोर्चा की पहले से गठित 9 सदस्यीय कमेटी के साथ भी बैठक की। पांच सदस्यीय समिति ने दिल्ली कूच के संकेत दिए थे।
शिव कुमार कक्का ने कहा कि सरकार के रवैये को देखते हुए आंदोलन अभी जारी रहेगा। अशोक धवले ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि कमेटी के गठन के बाद बाकी मसलों को लेकर बातचीत कुछ आगे बढ़ेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कमेटी के सदस्य युद्धवीर सिंह ने कहा कि बार-बार यह बात फैलाने का प्रयास किया जा रहा है कि किसानों की मांग पूरी हो गई, लेकिन किसान स्पष्ट करना चाहते हैं कि कोई मांग ऐसी नहीं है जो मांगपत्र से बाहर हो। बचे हुए विषयों को ही सरकार के सामने रखा है। सरकार ने पिछले दो दिन में उदासीनता दिखाई है। यह निराशाजनक है।
आंदोलन में डटे रहने के निर्णय के बीच पंजाब के किसानों की वापसी भी जारी है। कुंडली बॉर्डर से सोमवार को कई ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का पंजाब की ओर जाना जारी रहा। हालांकि, किसान नेता युद्धवीर सिंह ने कहा है कि किसानों के आने-जाने की प्रक्रिया पूरे साल से जारी है। किसान वापस नहीं जा रहे बल्कि यह रूटीन प्रक्रिया है। आंदोलन से किसानों की वापसी को जान बूझकर दिखाया जा रहा है। जबकि सच्चाई यह है कि आंदोलन से किसानों का आना-जाना लगा रहता है।
कुंडली बॉर्डर पर टीडीआई मॉल के पास धरनारत गुरदासपुर के गुरु नानक देव पंथ नाम की निहंग जत्थेबंदी रविवार देर रात वापस चली गई। निहंग जत्थेदारों ने दिन में ही अपना सामान समेटकर ट्रकों में लाद दिया था और घोड़ों को भी ट्रकों में चढ़ा लिया था। वह देर रात को यहां से रवाना हो गए।