सरकार ने किसानों की लंबित मांगों स्थिति स्पष्ट नहीं की और न ही पांच सदस्यीय समिति को बातचीत के लिए कोई निमंत्रण भेजा। दो दिन का अल्टीमेटम खत्म होने पर संयुक्त किसान मोर्चा मंगलवार को बैठक में आगे की रणनीति तय करेगा।
शिव कुमार कक्का ने कहा कि सरकार के रवैये को देखते हुए आंदोलन अभी जारी रहेगा। अशोक धवले ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि कमेटी के गठन के बाद बाकी मसलों को लेकर बातचीत कुछ आगे बढ़ेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
कमेटी के सदस्य युद्धवीर सिंह ने कहा कि बार-बार यह बात फैलाने का प्रयास किया जा रहा है कि किसानों की मांग पूरी हो गई, लेकिन किसान स्पष्ट करना चाहते हैं कि कोई मांग ऐसी नहीं है जो मांगपत्र से बाहर हो। बचे हुए विषयों को ही सरकार के सामने रखा है। सरकार ने पिछले दो दिन में उदासीनता दिखाई है। यह निराशाजनक है।
आंदोलन में डटे रहने के निर्णय के बीच पंजाब के किसानों की वापसी भी जारी है। कुंडली बॉर्डर से सोमवार को कई ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का पंजाब की ओर जाना जारी रहा। हालांकि, किसान नेता युद्धवीर सिंह ने कहा है कि किसानों के आने-जाने की प्रक्रिया पूरे साल से जारी है। किसान वापस नहीं जा रहे बल्कि यह रूटीन प्रक्रिया है। आंदोलन से किसानों की वापसी को जान बुझकर दिखाया जा रहा है। जबकि सच्चाई यह है कि आंदोलन से किसानों का आना-जाना लगा रहता है।
कुंडली बॉर्डर पर जारी किसान आंदोलन के मुख्य मंच के पास छह किसानों की एमएसपी की गारंटी के कानून बनाने की मांग को लेकर भूख हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही। किसान नेता राजेंद्र सिंह, सतनाम सिंह, बिक्रम सिंह, करतार सिंह, नरेश सांगवान व कुलदीप सिंह ने कहा कि एसकेएम को एमएसपी के मुद्दे को कानून बनने की तरफ अग्रसर होना चाहिए। यह किसानों की मुख्य मांग है। वह मंगलवार की बैठक में होने वाले निर्णयों के बाद आगे की रणनीति बनाएंगे।
कुंडली बॉर्डर पर टीडीआई मॉल के पास धरनारत गुरदासपुर के गुरु नानक देव पंथ नाम की निहंग जत्थेबंदी रविवार देर रात वापस चली गई। निहंग जत्थेदारों ने दिन में ही अपना सामान समेटकर ट्रकों में लाद दिया था और घोड़ों को भी ट्रकों में चढ़ा लिया था। वह देर रात को यहां से रवाना हो गए।
एसकेएम के आह्वान पर देशभर के किसान संगठनों ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर का महापरिनिर्वाण दिवस मनाया। एसकेएम समन्वय समिति के सदस्य डॉ. दर्शन पाल ने कहा कि भारत के संविधान ने प्रत्येक नागरिक को सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार दिया है, जिसे सुनिश्चित करने के लिए एसकेएम लड़ रहा है।
एसकेएम ने कहा कि जब हरियाणा सरकार और किसान संगठनों के बीच बातचीत चल रही है तो ऐसे में गृह मंत्री का बयान गैर जिम्मेदाराना है। एसकेएम राजनीति में शामिल नहीं है और किसानों के हितों की रक्षा के लिए लड़ रहा है।