सोनीपत। खेलों में देश का नाम रोशन करने वाले जिले के खिलाड़ियों की सूची में सोनीपत की लाडली प्रीति ने एक और कीर्तिमान जोड़ दिया है। प्रीति ने भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम का नेतृत्व करते हुए देश की झोली में एशिया कप का खिताब डाल दिया है। एशिया कप जीतने के साथ ही भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम ने जूनियर महिला हॉकी विश्वकप के लिए क्वालिफाई कर लिया है। सोनीपत की प्रीति ने एशिया कप जीत की ट्रॉफी संभाली।
जापान के काकमिगहारा में 2 से 11 जून तक आयोजित महिला जूनियर एशिया कप-2023 में भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम की कमान सोनीपत की भगत सिंह कॉलॉनी निवासी प्रीति ने संभाली। वहीं सोनीपत के ब्रह्म नगर निवासी मंजू भी टीम का हिस्सा रही। जिले की लाडलियों ने एशिया कप में शानदार खेल दिखाते हुए टीम को मजबूती दी। प्रीति के नेतृत्व में सभी खिलाड़ियों ने बेहतर खेल दिखाया। इनके दम पर भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम ने एशिया का खिताब अपने नाम किया। लाडलियों की उपलब्धि पर परिजन फूले नहीं समा रहे। (संवाद)
बेहद महत्वपूर्ण थी यह खिताबी जीत
महिला जूनियर एशिया कप भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण थी। ऐसा इसलिए था कि एशिया कप टूर्नामेंट से शीर्ष तीन देशों को एफआईएच जूनियर महिला हॉकी विश्व कप-2023 के लिए सीधा टिकट मिलना था। ऐसे में भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम की कमान संभाल रही सोनीपत की लाडली प्रीति के कंधों पर टीम को विश्वकप के लिए क्वालिफाई करवाने का भार था। इसे उन्हाेंने बेहतर तरीके से निभाया।
उधार की हॉकी लेकर करती थी अभ्यास, डाइट के लिए भी नहीं थे पैसे
भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम की कप्तान प्रीति की जिंदगी संघर्ष से भरी रही है। प्रीति में हॉकी खेलने का जुनून तो था, लेकिन अच्छी डाइट के लिए पैसे नहीं थे। वह उधार की हॉकी लेकर मैदान में अभ्यास करने के लिए जाती थी। प्रीति एक गरीब परिवार से संबंध रखती हैं। उनके पिता राजमिस्त्री और मां ने मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण किया।
प्रीति जब 10 साल की हुईं तो उनके पड़ोस की रहने वाली लड़कियां ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया स्थित हॉकी मैदान में खेलने जाती थीं। वहीं से प्रीति को हॉकी खेलने में दिलचस्पी हुई। उन्होंने परिवार को बिना बताए हॉकी स्टिक थाम ली। माता-पिता नहीं चाहते थे कि बेटी बाहर खेलने जाए। इसलिए वह मम्मी-पापा से झूठ बोलकर खेलने जाती रहीं। घर की आर्थिक स्थिति बुरी थी और माता-पिता बेटी को मुश्किल से पढ़ा पा रहे थे। हालांकि प्रीति की मंजिल और सपने अलग थे। उन्होंने मेहनत और लगन से हर परिस्थिति में अपना अभ्यास जारी रखा। हॉकी के प्रति लाडो का समर्पण देखकर पिता ने उनका साथ दिया। लाडली की खुशी के लिए कड़ी मेहनत की और उसके सपने को उड़ान देने के लिए रात-दिन एक कर दिए। प्रीति ने भी किसी परिस्थिति में खेलना नहीं छोड़ा।
देश व जिले के लिए गर्व की बात
भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम ने एशिया कप जीत विश्वकप के लिए क्वालिफाई किया है। टीम का नेतृत्व संभाल रही प्रीति के साथ ही खिलाड़ी मंजू भी सोनीपत की निवासी हैं। यह जिले के लिए गर्व की बात है। दोनों खिलाड़ी सोनीपत के औद्योगिक क्षेत्र स्थित हॉकी मैदान पर लंबे समय से अभ्यास कर रही हैं। दोनों खिलाड़ियों के साथ पूरी टीम को इस शानदार जीत के लिए बधाई।
- प्रीतम सिवाच, प्रशिक्षक व पूर्व कप्तान, भारतीय महिला हॉकी टीम।