सोनीपत। मुरथल स्थित दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीसीआरयूएसटी) में स्वीमिंग पूल बनाने में गड़बड़ी करने के आरोप लगे हैं। रिकॉर्ड मेें दिखाया गया है कि स्वीमिंग पूल में लगाए फिल्टर में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। इस तरह लगभग 22.86 लाख रुपये की गड़बड़ी का आरोप है।
आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने राज्य विजिलेंस ब्यूरो को मुरथल विश्वविद्यालय के एक अधिकारी के खिलाफ शिकायत की थी। शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने इस पर आरटीआई लगा सूचना मांगी। जवाब न मिलने पर पीपी कपूर ने राज्य सूचना आयोग को शिकायत की थी। इसके बाद अब राज्य सूचना आयोग ने विजिलेंस विभाग, उच्चतर शिक्षा निदेशालय व तकनीकी शिक्षा निदेशालय के जनसूचना अधिकारियों को नोटिस भेज कर 8 मार्च को तलब किया है।
आरटीआई एक्टिविस्ट समालखा निवासी पीपी कपूर ने डीसीआरयूएसटी के निर्माण विभाग के अधिकारियों के खिलाफ स्वीमिंग पूल के निर्माण में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए 3 अप्रैल 2021 को राज्य विजिलेंस ब्यूरो के टोल फ्री व्हाट्सअप नंबर पर सुबूतों सहित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत पर हुई कार्रवाई के बारे में जानकारी लेने के लिए उन्होंने 8 जुलाई 2021 को विजिलेंस विभाग में एक आरटीआई लगाई। पीपी कपूर का आरोप है कि आरटीआई आवेदन को विजिलेंस विभाग, निदेशालय तकनीकी शिक्षा व निदेशालय उच्चतर शिक्षा विभाग ने एक दूसरे के पास स्थानांतरण कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। सात महीने बाद भी स्वीमिंग पूल निर्माण मामले में न कोई कार्रवाई की और न ही आरटीआई आवेदन का किसी ने जवाब दिया। सूचनाएं न मिलने पर पीपी कपूर ने 3 दिसंबर 2021 को राज्य सूचना आयोग में आरटीआई एक्ट 2005 के सेक्शन 18 (2) के तहत शिकायत की। विजिलेंस विभाग, उच्चतर शिक्षा निदेशालय व तकनीकी शिक्षा निदेशालय के अधिकारियों पर आरटीआई एक्ट 2005 के तहत सूचनाएं न देने का आरोप है। जिस पर राज्य सूचना आयोग ने तीनों विभागों के जनसूचना अधिकारियों को नोटिस भेज 8 मार्च को तलब किया है। मामले की सुनवाई मुख्य सूचना आयुक्त यशपाल सिंघल करेंगे।
यह लगाया है आरोप
पीपी कपूर ने आरटीआई में आरोप लगाया कि टेंडर समझौते की शर्तों के अनुसार स्वीमिंग पूल के लिए प्रज्ञा मॉडल 2000 एमएम डायमीटर (टोटल एंटी कोरोसिव बोबीन वाउंड फिल्टर) के तीन फिल्टर लगाने थे। इसमें एक फिल्टर की कीमत 10 लाख 82 हजार 174 रुपये निर्धारित है। इसमें ही गड़बड़ी का आरोप है। साथ ही उन्होंने राज्य विजिलेंस ब्यूरो को दी शिकायत में आरोप लगाया है कि पिछले चुनावों में ड्यूटी से बचने के लिए विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने फर्जी मेडिकल बनवाया था। तत्कालीन उपायुक्त अंशज सिंह ने वर्ष 2019 उसे नौकरी से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति देने के आदेश भी दिए थे, लेकिन वह आज भी नौकरी कर रहे हैं।
वर्जन
यह मामला मेरे संज्ञान में आया है। इस बारे में रिकॉर्ड मांगा गया है। पहले पूरे रिकॉर्ड की जांच की जाएगी। जांच के बाद ही इस बारे में कुछ कहा जा सकेगा।
- प्रो. राजेंद्र कुमार अनायत, कुलपति, डीसीआरयूएसटी, मुरथल