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हरियाणा में हादसा: स्कूल के कमरे की छत गिरी, तीसरी कक्षा के 25 बच्चे और तीन मजदूर मलबे में दबने से घायल

Thu, 23 Sep 2021 02:54 PM IST
निवेदिता वर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, गन्नौर (हरियाणा)

सार

गांव बांय स्थित जीवानंद पब्लिक स्कूल में गुरुवार को तीसरी कक्षा के कमरे की कच्ची छत पर मिट्टी डाली जा रही थी। इसी दौरान अचानक छत भरभरा कर नीचे गिर गई। छत गिरने से 25 विद्यार्थी, एक शिक्षिका और तीन मजदूर घायल हो गए।
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स्कूल के कमरे की छत गिरने से बच्चे घायल। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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जीवानंद मॉडर्न पब्लिक स्कूल में गुरुवार को तीसरी कक्षा के कमरे की छत गिरने से 25 विद्यार्थी, एक शिक्षिका और तीन मजदूर घायल हो गए। हादसा तब हुआ जब कमरे की कच्ची छत पर मिट्टी डाली जा रही थी। छत पर लगी गार्डर-सिल्ली विद्यार्थियों व शिक्षिका पर गिर पड़ी। मजदूर भी छत से गिरकर घायल हो गए। चीख-पुकार के बीच आनन-फानन घायल बच्चों को निकालकर अस्पताल में पहुंचाया गया। 

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18 विद्यार्थियों, शिक्षिका व मजदूरों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी मिल गई थी। सात बच्चों की ज्यादा चोट के चलते निजी अस्पतालों में किया गया, जिन्हें उपचार के बाद देर शाम छुट्टी मिली। बड़ी थाने के प्रभारी देवेंद्र कुमार ने बताया कि अभिभावक के बयान पर स्कूल संचालक दिनेश कौशिक और ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। मामले में गहनता से जांच कर ठोस कार्रवाई की जाएगी। 

 

मरम्मत कार्य कर रहे थे मजदूर, अचानक कच्ची छत विद्यार्थियों और शिक्षिका पर गिरी

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बाय रोड स्थित जीवानंद मॉडर्न पब्लिक स्कूल के कमरों की कच्ची छत बारिश के चलते क्षतिग्रस्त हो गई थी। गुरुवार को स्कूल संचालक दिनेश कौशिक ने तीसरी कक्षा के कमरे की छत को ठीक करवाने के लिए ठेकेदार के तीन मजदूर लगा रखे थे। स्कूल संचालक के अनुसार तीसरी कक्षा में 33 विद्यार्थी आए हुए थे। उन्हें मरम्मत कार्य के चलते स्कूल के मैदान में बैठाकर उनकी परीक्षा ली गई थी। जब स्कूल की छुट्टी की घंटी बजी तो बच्चे व शिक्षिका कक्षा के अंदर रखे अपने बैग व लंच बॉक्स उठाने के लिए चले गए। 

इसी दौरान छत पर तीन मजदूर भी काम कर रहे थे। तभी कमरे की छत अचानक भरभरा कर गिर गई। छत पर लगी गार्डर-सिल्ली विद्यार्थियों व शिक्षिका पर गिर पड़ी और वह घायल हो गए। इसी दौरान मजदूर भी छत से गिरकर घायल हो गए। हादसे के तुरंत बाद 18 विद्यार्थियों, शिक्षिका व मजदूरों को उपचार के लिए गन्नौर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ले जाया गया। जबकि सात विद्यार्थियों को निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया। 

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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराए 18 विद्यार्थियों, शिक्षिका व मजदूरों को प्राथमिक उपचार देकर छुट्टी दे दी गई। इनमें से तीन बच्चों को एक्स-रे के लिए खानपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भेजा गया था। परिजनों ने उनके एक्स-रे भी गन्नौर में करा लिए। मामले की सूचना के बाद एसडीएम सुरेंद्र दून, सीएमओ डॉ. जयकिशोर, बीईओ कर्मबीर व बड़ी थाना प्रभारी इंस्पेक्टर देवेंद्र कुमार ने भी स्कूल का निरीक्षण किया। 

पुलिस ने मामले में अभिभावक गांव लाला गढ़ी निवासी राजेश कुमार के बयान पर स्कूल संचालक व ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। मामले में भादसं की धारा 288 व 337 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। 

हादसे में यह हुए घायल 
छात्रा विधि निवासी पटेल नगर, सोनाक्षी निवासी बाय, लक्ष्मी निवासी लाला गढ़ी, योगेश निवासी बाय, भावना निवासी बाय, अंश निवासी दातौली, चिराग निवासी दातौली, नसिमा निवासी बिलंदपुर, तनीषा निवासी बाय, सलोनी निवासी बाय, रूद्र निवासी रामनगर, साक्षी निवासी रामनगर, संध्या निवासी हरिनगर, दीपांशु निवासी गढ़ी केसरी, रोहित निवासी निकट आईटीआई गन्नौर, अरमान निवासी बडोत, जम्मू निवासी बाय, जय निवासी बाय, अंशु निवासी खेड़ी, निहाल निवासी दातौली, सूरज निवासी लालागढ़ी, निशु निवासी बाय, प्रिंस निवासी बाय, दिव्या निवासी बाय, समृद्धि निवासी गन्नौर के साथ ही गन्नौर निवासी शिक्षिका सोनम व तीन मजदूर शामिल हैं। इनमें अंशु, लक्ष्मी, सूरज, भावना, दिव्या, सलोनी को ज्यादा चोट लगी है। हालांकि उपचार के बाद उन्हें भी घर भेज दिया गया है।

स्कूल की छत गिरने से 25 विद्यार्थी घायल हुए थे। जिनमें से 18 को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी मिल गई थी। सात अन्य को देर शाम निजी अस्पताल में उपचार के बाद छुट्टी मिल गई। सभी बच्चे व अन्य घायल घर जा चुके हैं। मामले में गहनता से जांच कराई जाएगी। स्कूल संचालक के बयान की भी जांच कराकर ठोस कार्रवाई की जाएगी। - सुरेंद्र दून, एसडीएम गन्नौर।

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20 फीसदी से अधिक स्कूलों के कमरे जर्जर
हरियाणा में 26025 सरकारी स्कूलों में से 20 फीसदी के कमरे जर्जर स्थिति में हैं। तीन साल पहले तक यह आंकड़ा 25 प्रतिशत से ऊपर था। जर्जर भवनों की मरम्मत व रखरखाव पर सालाना लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं। इन्हें गिराने की प्रक्रिया लंबी है। पीडब्ल्यूडी (भवन एवं सड़कें) समय पर कार्रवाई ही नहीं करता। गन्नौर में गुरुवार को गिरी एक स्कूल की छत ने स्कूल शिक्षा विभाग और पीडब्ल्यूडी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा मंत्री कंवर पाल गुर्जर का कहना है कि जर्जर भवनों में बच्चों की कक्षाएं लगाने की मनाही है। गन्नौर की घटना को गंभीरता से लिया है। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
 
हर साल भेजी जाती है रिपोर्ट
शिक्षा विभाग हर साल अपने स्तर पर स्कूल भवनों का निरीक्षण कर जर्जर भवनों की रिपोर्ट पीडब्ल्यूडी को भेजता है। इन्हें कंडम घोषित करने का काम पीडब्ल्यूडी का है, जिसे विभाग के अधिकारी समय पर अंजाम नहीं देते। अनेक बार आग्रह करने के बावजूद कभी-कभार ही विभाग के अफसर जर्जर भवनों का मुआयना करने आते हैं। इस चक्कर में जर्जर भवनों व कमरों को गिराने में देरी होती है। भवन न गिरने की स्थिति में शिक्षा विभाग मरम्मत इत्यादि कर काम चलाता रहता है। कंडम कमरों को गिराने पर उनके मलबे को उठाने के रेट को लेकर भी अनेक बार पेच फंसता है, जिससे पूरी प्रक्रिया में और देरी होती है। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के ढुलमुल रवैये के आगे शिक्षा विभाग विवश है।

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