हरियाणा में स्मार्ट कार्ड के जरिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन बांटने की योजना ठप हो गई है। प्रदेश में यह सिर्फ चार खंडों के 7590 परिवारों में ही लागू है।
हरियाणा सरकार ने देश में सबसे पहले स्मार्ट कार्ड बनाने के लिए करीब 137 करोड़ रुपये का ठेका दिया था, मगर यह योजना बीच में दम तोड़ गई।
हरियाणा सरकार ने चार खंडों अंबाला, करनाल के घरौंडा, सोनीपत और सिरसा में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर स्मार्ट कार्ड बनाने का काम शुरू किया था। चार खंडों के बाद 17 जिलों में भी स्मार्ट कार्ड बनाने का ठेका दे दिया गया।
स्मार्ट कार्ड बनाने का कार्य जारी था कि इसी बीच आधार कार्ड बनाने का काम पूरे देश में शुरू हो गया। हरियाणा में स्मार्ट कार्ड बनाने वाली कंपनी को ही आधार कार्ड बनाने के लिए 17 जिलों का काम सौंप दिया।
न स्मार्ट कार्ड बन पाए और न ही आधार कार्ड। आधार कार्ड बनाने के लिए दूसरी कंपनियों को ठेका दिया गया।
पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर जिन चार खंडों में स्मार्ट कार्ड बनाने का काम शुरू हुआ था, उनमें स्मार्ट कार्ड बन गए और पिछले साल स्मार्ट कार्ड से राशन वितरित किया जा रहा है।
इसलिए नहीं बने स्मार्ट कार्ड
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अतिरिक्त निदेशक एके गौड ने बताया कि हरियाणा के साथ-साथ चंडीगढ़ में भी पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर स्मार्ट कार्ड बनाने का काम शुरू हुआ था। चंडीगढ़ में तो योजना फेल हो गई।
हरियाणा के चार खंडों में योजना सफल रही और राशन वितरण भी हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट में मामला चला गया तो केंद्र सरकार ने निर्देश दिए हैं कि सबसे पहले सब डिपो होल्डरों और सब लाभार्थियों का डाटा डिजिटल करो।
यह कार्य पहले चरण में करना है। दूसरे चरण में स्मार्ट कार्ड बनाए जाएंगे। चूंकि केंद्र ने स्मार्ट कार्ड बनाने पर रोक लगा दी है इसलिए चार खंडों के अलावा अन्य स्थानों पर स्मार्ट कार्ड नहीं बनाए गए।
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