सिरसा। कोरोना के कारण लगे लॉकडाउन से शिक्षण संस्थान बंद हो गए। ऐसे में ऑनलाइन पढ़ाई करवाने के लिए विद्यार्थियों के हाथों में स्मार्ट मोबाइल थमा दिए हैं। लेकिन ये मोबाइल लाभ की बजाय नुकसानदायक ज्यादा साबित हो रहा है। छोटे बच्चे भी राह से भटक गए और इसका खुलासा उस समय हुआ जब अभिभावक बच्चों को लेकर अस्पताल पहुंचे। अब काउंसिलिंग से बच्चों को डिप्रेशन से बाहर लाने का प्रयास किया जा रहा है।
हुुुआ यूं कि नागरिक अस्पताल स्थित मनोरोग चिकित्सक की ओपीडी में लॉकडाउन के बाद अचानक मरीजों की संख्या बढ़ गई। चौंकाने वाली बात ये है कि इनमें 8 से 10 छोटे बच्चे भी लाए गए जिनकी उम्र 10 वर्ष से भी कम थी। अभिभावकों ने चिकित्सकों को बताया कि उनका बच्चा डिप्रेशन में है और इसका इलाज करो। चिकित्सकों ने काउंसिलिंग की तो चौंकाने वाले खुलासे हुए। इसका मुख्य कारण भी उन्हें समझ आया और अब उक्त बच्चों को काउंसिलिंग से डिप्रेशन से बाहर लाने का प्रयास किया जा रहा है।
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अनोखा केस : सभी अभिभावकों को लेना होगा इससे सबक
नागरिक अस्पताल में एक परिवार अपनी करीब 7 साल की बच्ची को लेकर आए। अभिभावक ने बताया कि उनकी बेटी ने ऐसी डिमांड रख दी है जिसे समाज में बताया नहीं जा सकता। इसके पीछे कारणों की चिकित्सकों ने काउंसिलिंग से तलाश शुरू की। खुलासा हुआ कि बच्ची अपने पिता का मोबाइल ऑनलाइन पढ़ाई के लिए प्रयोग करती थी। पिता के मोबाइल में अश्लील वीडियो देखते थे। इसलिए पढ़ाई के दौरान इंटरनेट पर ब्राउजर हिस्ट्री में वे वीडियो नजर आ गई। बच्ची भटक गई और उसकी तरफ आकर्षित हो गई। परिणाम ये हुआ कि बच्ची ना तो स्कूल जाना पसंद करती है और ना ही घर वालों के बीच बैठना। वह केवल मोबाइल अपने पास रखना चाहती है और उसने अपने माता-पिता के साथ अनोखी डिमांड रख दी जिसे सुनकर परिवार के सभी सदस्यों के होश उड़ गए। ये केस अकेला नहीं है, बल्कि ऐसे करीब 8 से 10 केस नागरिक अस्पताल में आए हैं। कई बच्चे ऐसे हैं जिन्हें गेम खेलने की आदत लग चुकी है और हिंसात्मक गेम के आदि हो गए हैं।
अभिभावकों को ये रखनी होगी सावधानी
- कोशिश करें ऑफलाइन पढ़ाई करवाएं।
- ऑनलाइन पढ़ाई करवानी हो तो गैजेट्स का प्रयोग अभिभावक मॉनीटरिंग के साथ करने दें।
- बच्चे गेमिंग की तरफ ज्यादा हो रहे हों तो मोबाइल की आदत छुड़वाएं।
- घर में रहते अभिभावक स्वयं भी मोबाइल का प्रयोग बच्चों के सामने कम से कम करें।
- बच्चा ज्यादा डिप्रेशन में हो तो मनोरोग विशेषज्ञ के पास जरूर ले जाएं।
- बच्चों की दिनचर्या पर विशेष नजर बनाकर रखें।
- 12 साल से अधिक आयु के किशोरों की समस्या सुनें और उनके सवालों का जवाब जरूर दें।
स्वास्थ्य विभाग कर रहा विशेष शिविर आयोजित, रैली भी निकाली जाएगी
मेंटल हेल्थ विभाग की ओर से विशेष शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इसमें कोई भी व्यक्ति जो डिप्रेशन का शिकार हो, उसे ले जाया जा सकता है। चिड़चिड़ापन का शिकार बच्चों को भी शिविर में काउंसिलिंग की जाएगी। इससे पहले विभाग के डॉक्टर जिला जेल, वृद्धाश्रम में शिविर आयोजित कर चुके हैं। इसके अलावा 16 अक्तूबर को जागरुकता रैली का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें नर्सिंग छात्राएं भाग लेंगी।
बच्चों का ख्याल रखना बहुत जरूरी
कई बार अभिभावकों की असावधानी बच्चों को गलत दिशा में ले जाती है। लॉकडाउन में ऑनलाइन पढ़ाई के नाम पर बच्चों के हाथ में मोबाइल आ गए। बच्चों ने लॉकडाउन में घर रहते हुए मां-बाप के अक्सर होने वाले झगड़ों को भी देखा है। इससे उन पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। अभिभावक अपना मोबाइल बच्चों के हाथ में देते समय सावधानी बरतें और अपनी सर्च हिस्ट्री को छिपा दें। बच्चों की मॉनिटरिंग करना भी जरूरी है।
-डॉ. पंकज, मनोरोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल, सिरसा