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डेढ़ एकड़ जमीन में अनार के 500 पौधे लगाकर खोजा अतिरिक्त कमाई का जरिया

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जमाल के किसान शंकरलाल सहारण । - फोटो : Sirsa
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चोपटा (सिरसा)। राजस्थान की सीमा से सटे पैंतालिसा क्षेत्र के किसान परंपरागत खेती के साथ-साथ आधुनिक तरीके से खेती करके कमाई कर रहे हैं। किसान बागवानी, पशुपालन, सब्जियां इत्यादि लगाकर अपने घर की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना रहे हैं। यह क्षेत्र राज्य के अंतिम छोर पर पड़ने के कारण हमेशा ही नहरी पानी की कमी से जूझता रहता है। क्षेत्र के किसान आमदनी बढ़ाने के लिए कृषि क्षेत्र में नए-नए तरीकों की खोज करने में लगे रहते हैं।
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इसी कड़ी में क्षेत्र के सबसे बड़े गांव जमाल के किसान शंकरलाल सहारण ने मई 2020 में डेढ़ एकड़ जमीन में अनार के 500 पौधे लगाकर परंपरागत खेती के साथ बागवानी खेती शुरू की है। किसान शंकरलाल सहारण का कहना है कि परंपरागत खेती के साथ-साथ बागवानी, फल सब्जियां इत्यादि लगाकर किसान आत्मनिर्भर बन सकते हैं। संवाद
गांव शाहपुरिया के प्रगतिशील किसान राजवीर सिंवर से प्रेरणा लेकर लगाया बाग, बढ़ी आमदनी
किसान शंकरलाल ने बताया कि नहरी पानी की कमी, प्राकृतिक आपदाओं, बीमारियों इत्यादि से परंपरागत खेती में फसलों का उत्पादन कम होने लगा और बचत भी नहीं हो पा रही थी। ऐसे में उसने खेती में आमदनी बढ़ाने का जरिया खोजना शुरू किया तो गांव शाहपुरिया के प्रगतिशील किसान राजवीर सिंवर से प्रेरणा लेकर उन्होंने डेढ़ एकड़ जमीन में अनार का बाग लगाया। जिसमें 500 पौधे लगाए। इसमें अभी तक कम ही फल लगने शुरू हुए हैं तो उन्होंने अनार के पौधों की कतारों के बीच डेढ़ एकड़ में तरबूज, पीला तरबूज, लाल तरबूज, पीला खरबूजा, चाइनीस खीरा, तोरी, ककड़ी, घिया आदि सब्जियां लगाई। जिससे उसे करीब डेढ़ लाख रुपये की कमाई हुई। वे अधिकतर बागवानी खेती में जैविक खाद का प्रयोग करते हैं। जब तक अनार के पौधे पूरी तरह फलदार नहीं हो जाते तब तक वह इनकी कतारों में सब्जियां इत्यादि लगाकर अतिरिक्त कमाई कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें दोहरा लाभ हो रहा है ।
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सरकार की सहायता से खेत में लगाया सोलर और ड्रिप सिस्टम
शंकरलाल ने बताया कि उन्होंने सरकार की सहायता से खेत में सोलर सिस्टम से नलकूप लगाया हुआ है और जिससे जब जरूरत होती है ड्रिप सिस्टम द्वारा सिंचाई कर पौधों को पानी सीधा जड़ों में दिया जाता है। जिससे एक तो पानी की बचत होती है और पौधों को जरूरत के हिसाब से पानी व खाद इत्यादि मिल जाती है। यह सब सरकार के सहयोग से मिला है।
कृषि विभाग के अधिकारी समय रहते बताएं उत्पादन बढ़ाने के तरीके:
किसान का कहना है कि समय-समय पर कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा क्षेत्र के किसानों को फल सब्जियों में फैलने वाली बीमारियों से अवगत कराया जाना चाहिए। जिससे समय रहते दवाइयों का छिड़काव करके बीमारियों को काबू किया जा सके। किसान ने बताया कि उसके गांव से सिरसा मंडी दूर पड़ती है। जिससे फलों को वहां ले जाकर बेचने में यातायात खर्च ज्यादा आता है। बचत कम होती है। इसके अलावा नजदीक में कोई वैक्सिंग प्लांट भी नहीं है। जिसमें की फलों को संभाल कर रखा जाए। उसका कहना है कि अगर फलों व सब्जियों की मंडी चोपटा में विकसित हो जाए तो यातायात खर्च कम होने से बचत ज्यादा हो जाएगी। इसके अलावा एक वैक्सिंग प्लांट भी लगाया जाए।
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