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Sirsa News: ओढां थाना में सात गांव के लोगों ने दिया धरना

Mon, 25 Dec 2023 10:05 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
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ओढां थाने में धरना प्रदर्शन करते लोगों से बात करते थाना प्रभारी। (संवाद)
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ओढां।
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जनता अधिकार मोर्चा के बैनर तले सात गांवों के लोगों ने ओढां थाना में सोमवार को एक घंटे तक सांकेतिक प्रदर्शन किया। धरनारत लोगों ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोप लगाए कि उनकी शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। थाना प्रभारी अनिल कुमार के आश्वासन के बाद लोगों ने धरना समाप्त कर दिया। लोगों ने चेतावनी दी कि यदि पुलिस ने कार्रवाई नहीं की तो उन्हें पक्का धरना लगाने को विवश होना पड़ेगा।

जनता अधिकार मोर्चा के राष्ट्रीय प्रभारी करनैल सिंह ओढां, प्रदेशाध्यक्ष जसविंदर सिंह बब्बू व भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष अमन कुमार ने कहा कि एक तरफ तो पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी कह रहे हैं कि लोगों की शिकायतों पर तुरंत सुनवाई की जाए, वहीं दूसरी तरफ स्थिति ये है कि लंबे समय से शिकायतों को ठंडे बस्ते में डाला हुआ है। बार-बार चक्कर लगाने के बाद पुलिसकर्मी आश्वासन देकर टरका देते हैं। उन्होंने कहा कि गांव बनवाला में करीब छह दिन पूर्व गांव के कुछ लोगों ने वाल्मीकि समाज के दो युवकों पर हमला करके बुरी तरह से घायल कर दिया। शिकायत देने के बावजूद पुलिस ने अभी तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। वहीं गांव मिठड़ी, जंडवाला जटान, ओढां व नुहियांवाली के लोगों की काफी शिकायतें लंबे समय से लंबित हैं। करनैल सिंह ओढां ने कहा कि उन्होंने पुलिस को एसई एसटी एक्ट के मामले की शिकायत दी थी, जिस पर डीएसपी कालांवाली ने एक पुलिसकर्मी के कहने पर उनकी शिकायत को रद्द कर दिया। इस मामले में उनके पास सबूत भी थे। उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई तो जनता अधिकार मोर्चा व अन्य संगठन लोगों के साथ मिलकर थाने में पक्का धरना लगाएंगे। इस अवसर पर बलविंदर सिंह टोनी, मीता सिंह, गुरदिता सिंह, अमीलाल, रामसिंह, गोपीराम व काला सिंह सहित अन्य लोग मौजूद थे।
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मनुस्मृति व ईवीएम का किया दहन

धरना के दौरान पूर्व जनता अधिकार मोर्चा की ओर से मनुस्मृति व ईवीएम की शव यात्रा निकालकर बस स्टैंड के निकट दहन किया गया। करनैल सिंह ओढां ने कहा कि देश में डॉ. आंबेडकर द्वारा बनाया गया संविधान है, लेकिन फिर भी मनुस्मृति की धारा के तहत बहुत सारे कार्य हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे इसे लागू नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि 8 अक्टूबर 2013 को जब उच्चतम न्यायालय ने ईवीएम को गलत ठहरा दिया था तो फिर अभी तक ईवीएम क्यों चल रही हैं। उन्होंने कहा कि ईवीएम प्रजातंत्र व लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है।
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