एडीजीपी श्रीकांत जाधव ने सिरसा एसपी कार्यालय में प्रेसवार्ता की। उन्होंने कहा कि साल 2014 में दर्ज हुए मामले में आठ साल तक धीमी गति से चली जांच को कोई नकार नहीं सकता है। एडीजीपी ने कहा कि पूर्व में इतनी ढिलाई क्यों हुई। उसको लेकर वह कुछ नहीं कह सकते है। हां, इसमें जिस भी विभाग, भले ही पुलिस विभाग के अधिकारी या कर्मचारी संलिप्त हो, सभी पर कार्रवाई की जाएगी। कोई बख्शा नहीं जाएगा। 300 करोड़ रुपये की रिकवरी को लेकर कानूनी रूप से जो प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए, वह अपनाई जाएगी। जांच का दायर निरंतर बढ़ रहा है। ऐसे में एसआईटी के सदस्यों संख्या बढ़ाई जाएगी, ताकि मजबूत दस्तावेजों के साथ कार्रवाई अमल में लाई जा सके। प्रदेश के साथ देश के अन्य राज्यों से भी मामला जुड़ा हुआ है। एडीजीपी ने कहा कि जांच के दायरे का बढ़ाने के साथ ईडी सहित जांच एजेंसियों को भी शामिल किया जाएगा।
गुजरात और दिल्ली में जुड़े हैं तार
फर्जी फर्म मामले में मुख्य रूप से गुजरात और दिल्ली से तार जुड़े हुए हैं। 30 मामले गुजरात में दर्ज हैं और कुछ मामले दिल्ली में दर्ज हैं। अभी आरोपी पदम बंसल व अमित बंसल रिमांड पर हैं। रिमांड पर हर एंगल को खंगाला जा रहा है। किन-किन राज्यों में इनका नेटवर्क था और कौन कौन इनसे जुड़े हुए थे।
10618 करोड के घोटाले का किया था खुलासा
हरियाणा के तत्कालीन लोकायुक्त प्रीतम पाल ने शिकायत संख्या 867/2011 की जांच की जिम्मेदारी 2014 में तत्कालीन आईजी श्रीकांत जाधव को सौंपी थी। इनके नेतृत्व में कमेटी का गठन हुआ था। इसमें 11 सदस्य पुलिस विभाग के अधिकारी व तीन सदस्य टैक्सेशन डिपार्टमेंट के शामिल हुए थे। श्रीकांत जाधव ने उस वक्त सिरसा, कैथल, बहादुरगढ़, गुरुग्राम (गुड़गांव), फरीदाबाद सहित 10 जिलों के रोड साइड चेकिंग कार्य की भी समीक्षा की थी। जांच के दौरान वेट रिफंड के केसों में बहुत सारी अनियमितताएं पाई गई थीं। उन्होंने जांच के बाद वैट रिफंड में अनुमानित 10618 करोड़ के घोटाले के बारे में रिपोर्ट 14 जनवरी 2015 में पेश की थी। इसके आधार पर गलत तरीके से रिफंड करने वाले टैक्सेशन विभाग के अधिकारियों व गलत तरीके से रिफंड प्राप्त करने वाले व्यापारियों पर कार्रवाई के आदेश दिए गए थे। आठ साल तक अधिकारी बदलते रहे और जांच धीमी गति से चलती रही।
फर्जी बिल बनवाकर करवाते थे टैक्स रिफंड
आरोपी फर्जी फर्मों के माध्यम से टैक्स रिफंड करवाने का काम करते थे। इसमें अधिकारी भी साथ में मिले होते थे। यही कारण रहा है कि गुजरात, राजस्थान, दिल्ली सहित कई राज्यों में इनके तार बढ़ी तेजी से फैलते गए। कुछ ही वर्षों में आरोपी हजारों करोड़ रुपये का घोटाला करने में कामयाब रहे है। सिरसा में ही 300 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया।
यह बनाई थी फर्जी फर्म, सिरसा में 34 केस दर्ज
फर्जी फर्म मामले में सिरसा में ही 34 मुकदमे विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किए गए हैं। इनमें 16 केस 2016 में व 18 केस 2020 में दर्ज किए थे। जीएसटी चोरी के मामले में जांच के दौरान सिरसा में 60 फर्में फर्जी पाई गई हैं। इस मामले मे शहर के चार्टर्ड अकाउंटेंट, जीएसटी वकील भी संदेह के घेरे में है। पदम बंसल ने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर रोहित ट्रेडिंग कंपनी सिरसा, बालाजी ट्रेडिंग कंपनी, भारत ट्रेडिंग कंपनी, गंगाराम ट्रेडिंग कंपनी, विजय ट्रेडिंग कंपनी, तिरुपति ट्रेडर्स, फर्म हजारी लाल श्याम सुंदर ट्रेडिंग कंपनी, रजत ट्रेडर्स, जगदंबा ट्रेडिंग कंपनी, आरके ट्रेडिंग कंपनी, जेसी इंटरप्राईजिज, पारस ट्रेडिंग कंपनी, संजय सेल्स एजेंसी सहित 21 फर्मों बनाई है, जिनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा चुका है।