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सीडीएलयू में डिजिटल हुई लाइब्रेरी, एक क्लिक पर मिलेगी सभी पुस्तकों की जानकारी

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सीडीएलयू की लाइब्रेरी में स्थापित की गई कियोस्क मशीन। संवाद। - फोटो : Sirsa
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भूपेंद्र पंवार
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सिरसा। चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय की सेंट्रल लाईब्रेरी को डिजिटल रूप दे दिया गया है। अब विद्यार्थियों को लाइब्रेरी में पुस्तकें ढूंढने के लिए रैक नहीं खंगालने पड़ेंगे। मोबाइल एप पर एक क्लिक से ये जानकारी मिल जाएगी। इतना ही नहीं पुस्तक इश्यू कराने के बाद नोटिफिकेशन भी आएगा और ई-मेल भी। ताकि वापस कब जमा करवानी है, इसकी भी जानकारी मिल सके। लाइब्रेरी में बैठकर पढ़ने के लिए रीडिंग हॉल की क्षमता भी बढ़ा दी है और इन्हें वातानुकूलित कर दिया गया है।
सीडीएलयू की स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी में 1.12 लाख से ज्यादा पुस्तकें उपलब्ध हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में जरनल, ई-बुक्स और अन्य कंटेंट है। लाइब्रेरी में सीडीएलयू कैंपस के 24 से ज्यादा विभागों के 3700 से ज्यादा विद्यार्थी रजिस्टर्ड हैं, जो नियमित रूप से आते हैं। अभी तक विद्यार्थियों को अपनी पसंद या पाठ्यक्रम से संबंधित पुस्तक ढूंढने के लिए लाइब्रेरी के रैक खंगालने पड़ते थे। इसमें समय बर्बाद होता था और ये भी नहीं पता चलता था कि पुस्तक उपलब्ध है या नहीं। यदि नहीं है तो ये भी नहीं पता चलता था कि कब उपलब्ध होगी। इसके अलावा एक बार पुस्तक इश्यू करवाने के बाद कई बार विद्यार्थी वापस जमा करवाना भूल जाते थे। ऐसे में जुर्माना लगता था। लेकिन अब इन सब समस्याओं से छुटकारा मिल जाएगा। सीडीएलयू के वीसी प्रो. अजमेर सिंह मलिक के व्यक्तिगत प्रयासों से सेंट्रल लाइब्रेरी को डिजिटल कर दिया गया है। इसका लाभ अब सीडीएलयू की रैंकिंग सुधरने में भी मिलेगा। क्योंकि सीडीएलयू में नैक की टीम 6, 7 और 8 जुलाई को निरीक्षण करने के लिए आएगी। संवाद
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सभी पुस्तकों का नंबरीकरण कर सॉफ्टवेयर से जोड़ा
सीडीएलयू प्रशासन ने लाइब्रेरी को डिजिटल कर दिया है। सभी पुस्तकों का नंबरीकरण का दिया गया है और सॉफ्टवेयर से जोड़ दिया है। सीडीएलयू ने एक मोबाइल एप्लीकेशन भी विद्यार्थियों, शिक्षकों के लिए जारी की है। इसके अलावा यदि कोई विद्यार्थी पुस्तक जारी करवाता है तो उसे समय-समय पर नोटिफिकेशन के माध्यम ये सूचनाएं मिलती रहेंगी।
लाइब्रेरी से जुड़ी सभी सुविधाएं ऑनलाइन
सीडीएलयू की ओर से लाइब्रेरी के मुख्य गेट पर एक कियोस्क मशीन स्थापित कर दी गई है। इसमें भी लाइब्रेरी से जुड़ी सभी ऑनलाइन सुविधाएं उपलब्ध हैं। जिससे विद्यार्थी सीधे उस रैक के पास जाएगा और पुस्तक निकालकर अपने नाम पर पंजीकरण करवा लेगा।
रीडिंग हॉल वातानुकूलित, विद्यार्थियों की क्षमता भी बढ़ेगी
लाइब्रेरी में अभी तक केवल एक रीडिंग हॉल था, जिसमें करीब 100 विद्यार्थी ही बैठकर पढ़ सकते थे। लेकिन अब प्रशासन ने दो नए रीडिंग हॉल भी उपलब्ध करवा दिए हैं। यहां अब 250 से ज्यादा विद्यार्थी एक साथ बैठकर पढ़ पाएंगे। साथ ही इन हॉल को पूरी तरह वातानुकूलित कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि जल्द ही रीडिंग हॉल में नया फर्नीचर भी उपलब्ध करवाया जाएगा, जिससे आगामी चार माह के भीतर यहां विद्यार्थियों की क्षमता 500 तक हो जाएगी। लकड़े-लड़कियों के लिए अलग-अलग रीडिंग हॉल की व्यवस्था है।
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सुधार दी है व्यवस्था, विद्यार्थियों के लिए सुविधा दी : डॉ. शैलेंद्र हुड्डा
हमारा प्रयास है कि विद्यार्थियों के लिए अधिक से अधिक सुविधा उपलब्ध करवाएं। इसलिए वीसी प्रो. अजमेर सिंह मलिक के व्यक्तिगत प्रयासों से लाइब्रेरी को डिजिटल कर दिया गया है। अब मोबाइल एप और लाइब्रेरी के नये सॉफ्टवेयर के माध्यम से पुस्तकों की जानकारी मिलेगी। सभी पुस्तकों का नंबरीकरण कर दिया गया है और लाइब्रेरी के मुख्य गेट पर कियोस्क मशीन भी स्थापित कर दी गई है। इसके अलावा रीडिंग हॉल और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध आकरवा दी हैं। - डॉ. शैलेंद्र हुड्डा, लाइब्रेरियन, सीडीएलयू, सिरसा।
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