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नौ मांगों पर बनी सहमति तो साढ़े 31 घंटे बाद पानी की टंकी से उतरे किसान, एसडीएम को सौंपा मांग पत्र

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पानी की टंकी पर चढ़े किसान रस्सी से नीचे खाने का सामना ऊपर खींचते हुए - फोटो : sm 3
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गोरीवाली, डबवाली (सिरसा)। भारतमाला प्रोजेक्ट के विरोध में और 10 मांगों को लेकर गांव डबवाली के बूस्टिंग स्टेशन की टंकी पर चढ़े किसानों और अधिकारियों के बीच कई मांगों पर समझौता होने के बाद किसानों ने प्रदर्शन समाप्त कर दिया है। साढ़े 31 घंटे बाद किसान टंकी से उतर गए और शाम साढ़े सात बजे एसडीएम राजेश पूनिया को मांग पत्र सौंपकर धरना भी समाप्त कर दिया।
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भारत माला प्रोजेक्ट के विरोध में बीते दिन वीरवार दोपहर 12 बजे किसानों ने पहले जोगेवाला में बैठक की थी। लेकिन इसके बाद कई किसान गांव डबवाली में पहुंच गए। जिसके बाद किसान राकेश फगोड़िया, सतनाम सिंह और सुरजीत सिंह जोगेवाला बूस्टिंग स्टेशन पर चढ़ गए और अन्य किसानों ने बाहर से ताला लगा दिया। किसानों ने टंकी पर ही रात गुजारी और खाना खाया। शुक्रवार को एसडीएम राजेश पूनिया, डीएसपी कुलदीप बैनीवाल, बीडीओ रमेश मिठरानी, पब्लिक हेल्थ एसडीओ विशाल ज्याणी ने किसानों से दो घंटे तक बैठक की लेकिन इसके बाद भी मांगों पर सहमति नहीं बनी। वहीं किसानों ने कहा कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता वह टंकी से नीचे नहीं उतरेंगे। हालांकि देर शाम को भी एसडीएम किसानों की नौ मांगों पर सहमति जताई तो किसानों ने टंकी से उतरकर एसडीएम को मांग पत्र सौंप दिया और धरना समाप्त कर दिया।
दोपहर के समय दो घंटे तक चली बैठक, लेकिन नहीं निकला हल
शुक्रवार दोपहर के समय एसडीएम डबवाली राजेश पूनिया, एनएचएआई के अधिकारी, डीएसपी कुलदीप बैनीवाल, बीडीओ रमेश मिठरानी, एसडीओ पब्लिक हेल्थ विशाल ज्याणी ने किसानों के जलघर में लगे पक्के मोर्चे पर पहुंचकर उनकी मांगों को सुना। उन्होंने एनएचएआई के अधिकारियों को अधिग्रहण हुई भूमि के किसानों को किसी भी प्रकार की समस्या न आने की बात कहीं। उन्होंने किसानों की हर जायज मांग को पूरा करने का आश्वासन दिया। वहीं प्रशासनिक अधिकारियों व किसानों के बीच कई मांगों को लेकर सहमति बनी। कुछ मांगों को लेकर उन्होंने किसानों को कोर्ट का सहारा लेने की बात कहीं। उन्होंने कहा कि जो भी उनके माध्यम से मांग पूरी करवाई जा सकती है वह एनएचएआई से पूरी करवा देंगे। वहीं उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों व एनएचएआई के अधिकारियों को भी निर्देश दिए। वहीं किसान राकेश फगोडिया, सतनाम सिंह, सुरजीत सिंह, दयाराम उलानिया, गुरमेल सिंह, गुरतेज सिंह, हरचरण सिंह ने बताया कि एनएचएआई द्वारा सड़क निर्माण के साथ लगते किसानों के फसलों को भी काफी क्षति पहुंचाई जा रही है। जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि एनएचएआई द्वारा साथ लगते किसानों की गेहूं व सरसों की फसल को हुए नुकसान की भरपाई की जाए। किसानों की ट्यूबवेल पाइप लाइनों को भी काफी नुकसान पहुंचाया जा रहा है इसकी भरपाई एनएचएआई से करवाई जाए।
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इन मांगों पर बनी सहमति
- सिंचाई पानी के लिए बनने वाले खाल की ऊंचाई चौड़ाई किसान द्वारा दिए सुझाव अनुसार तैयार होगा।
- किसानों की भूमि व संरचना का अवार्ड के रुपये में किसानों के खाते में डाले जाएंगे।
- निर्माणाधीन हाईवे पर बनने वाले अंडर पास किसानों के साधन जैसे कंबाइन ट्रैक्टर ट्राली को ध्यान में रखते हुए बनाए जाएंगे।
- एनएचएआई द्वारा कब्जा कार्रवाई के दौरान अपने निर्धारित अधिकृत भूमि के अलावा जिन किसानों की फसल रौंदी गई है उनका तुरंत समाधान एनएचएआई से करवाया जाएगा ।
- जिन किसानों के रिहायश मकान हाईवे के दायरे में आ रहे है उनके मकानों के रुपये खाते में डालने के 4 महीने बाद मकान खाली करवाई जाए।
- हाईवे निर्माण के दौरान किसानों के सिंचाई खाल यथा स्थिति में रखे जाएंगे ।
- जिन गांव से बाईपास ग्रीन फील्ड तारी डोर निकल रहा है उसके दोनों साइड ओं सर्विस रोड बनाए जाएंगे।
- निर्माणाधीन हाईवे के अंदर जिन किसानों की भूमि गत पाइप लाइन आ रही है उनको स्थायी तौर पर रोड के नीचे से गुजारा जाएगा।

किसान से बात करते अधिकारी- फोटो : sm 1

पानी की टंकी पर चढ़ने वाले किसान।- फोटो : sm 2

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