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टिकट कटने पर नाराज हुए पूर्व विधायक भरत, भाजपा के लिए संकट, कैसे करें प्रचार

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सिरसा। ऐलनाबाद उपचुनाव की तैयारी पूरी हो चुकी है। तीनों प्रमुख दलों ने अपने-अपने प्रत्याशी मैदान में उतार दिए हैं। पार्टियों ने हाल ही में दल-बदलकर आए नये चेहरों पर दांव खेला है। इससे जहां एक ओर कांग्रेस में नाराजगी बढ़ी है वहीं दूसरी ओर भाजपा कृषि कानूनों को लेकर किसानों का विरोध-प्रदर्शन एक अलग ही संकट है। कांग्रेस ने पूर्व विधायक भरत सिंह बैनीवाल की टिकट काटकर रिश्ते में उन्हीं के भतीजे हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए पवन बैनीवाल को उम्मीदवार बनाया है। इससे पूर्व विधायक में नाराजगी है और उन्होंने समर्थकों की बैठक बुला ली। इतना ही नहीं वे नामांकन के समय भी पार्टी नेताओं के साथ नहीं गए।
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कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर विधायक रह चुके भरत बैनीवाल को पूरी उम्मीद थी कि इस बार भी पार्टी उन्हें ही मौका देगी। लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने हाल ही में भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए पवन बैनीवाल को टिकट थमा दिया। शुक्रवार को पवन बैनीवाल ने प्रदेेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कांग्रेस नेता विवेक बंसल की उपस्थिति में नामांकन दाखिल किया। टिकट कटने पर पूर्व विधायक भरत सिंह बैनीवाल ने नाराज हो शुक्रवार सुबह उन्होंने अपने समर्थकों की बैठक बुला ली। इस दौरान समर्थकों से बात करते हुए भरत सिंह ने कहा कि पार्टी इस तरह पहले भी उनकी टिकट काट चुकी है। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि कुछ दिन पूर्व पार्टी में आए व्यक्ति को टिकट दे दी गई। भरत सिंह ने कहा कि अब वे अपने समर्थकों से बातचीत कर आगे का फैसला लेंगे।
इनेलो : पार्टी के अस्तित्व पर संकट के बादल
जाट बाहुल्य इलाका होने के कारण ऐलनाबाद 2009 से ही चौटाला का गढ़ रहा है। पूर्व में विधायक रहे अभय सिंह चौटाला इंडियन नेशनल लोकदल की तरफ से फिर से मैदान में आ चुके है। उनके इस्तीफा देने पर ही ये सीट खाली हुई थी। उनके ऊपर इनेलो को बचाने का दारोमदार है क्योंकि वह इनेलो पार्टी के एकमात्र विधायक वही थे। यदि वे ये चुनाव हार जाते हैं तो पार्टी के अस्तित्व पर सवालिया निशान खड़ा हो सकता है। हार से कार्यकर्ताओं में निराशा बढ़ेगी।
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कांग्रेस : टिकट कटने से निराशा, भीतरघात है समस्या
किसी जमाने में इनेलो के कद्दावर नेता रहे पवन बैनीवाल को कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी बनाकर मैदान में उतारा है। हालांकि उनके पास भी इस समय किसानों के अच्छे वोट है क्योंकि उन्होंने भी कृषि कानूनों के विरोध में भाजपा को अलविदा कह कांग्रेस का दामन थामा था। उन्हें मैदान में उतारने के लिए पार्टी ने अपने पूर्व विधायक भरत सिंह बैनीवाल का टिकट काट दिया। इससे पार्टी कार्यकर्ताओं में निराशा है और भीतरघात की आशंका है। यदि ऐसा हुआ तो इसका सीधा लाभ इनेलो को मिलने की संभावना है।
भाजपा-जजपा : पैराशूट से उतरे उम्मीदवार पर आस
भाजपा-जजपा गठबंधन ने हाल ही में भाजपा में शामिल हुए गोबिंद कांडा को मैदान में उतारा है। भाजपा को उम्मीद है कि उनका उम्मीदवार जीत दर्ज करेंगे। लेकिन भाजपा और जजपा के खिलाफ किसान आक्रोशित हैं और हर तरफ से उनका विरोध हो रहा है। नामांकन भरने के लिए भी भाजपा नेताओं का ऐलनाबाद पहुंचना समस्या हो गया। भारी पुलिस फोर्स तैनात करनी पड़ी और कड़ी सुरक्षा के बीच ले जाया जा सका। डीसी और एसपी भी मौके पर रहे। लेकिन ये हर बार भाजपा प्रत्याशी और नेताओं के दौरे के दौरान प्रशासन के लिए संभव नहीं है। ऐसे में भाजपा-जजपा के सामने चुनौती है कि ऐलनाबाद क्षेत्र में प्रचार अभियान को कैसे गति देंगे। क्योंकि वे जहां भी जाते हैं, किसानों का विरोध शुरू हो जाता है।
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